April 5, 2026

सांसद के उठाये बाढ़ एवं कटाव से लुप्त हुए गांवों के पुनर्वास के सवाल पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने दिया जवाब

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प्रवीण कुमार( कटिहार)

कटिहार संसदीय क्षेत्र में बाढ़ और कटाव से उजड़े गांवों का मुद्दा अब केंद्र सरकार के जवाब और सांसद के पलटवार के बीच गरमा गया है। लोकसभा के शून्यकाल में सांसद तारिक अनवर द्वारा उठाए गए कटिहार संसदीय क्षेत्र मे बाढ़ एवं कटाव से लुप्त हुए गांवों के पुनर्वास के सवाल पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लिखित जवाब भेजा है। जिसपर सांसद श्री अनवर ने सरकार के द्वारा भेजे गए जवाब को बेहद निराशाजनक बताया। प्रभावित किसान आज भी मदद के इंतजार मे है, लेकिन न कर्ज माफी, न विशेष पैकेज की घोषणा। संकट गहरा रहा है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता कही और दिखती है। आखि़र किसानों के साथ यह अन्याय कब तक? कटिहार जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता पंकज कुमार तमाखुवाला ने बताया कि सांसद श्री अनवर को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री राय ने अपने पत्र में 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए करोड़ों के फंड और नई नीतियों का ब्यौरा दिया है। सांसद श्री अनवर ने इस सरकारी जवाब को निराशाजनक और जमीनी हकीकत से कोसों दूर बताया है। उनका कहना है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री राय के पत्र में 1,500 करोड़ और 1,000 करोड़ रुपये के जिन फंड्स का जिक्र है।वे केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। मंत्री श्री राय ने पत्र में स्पष्ट किया है कि केंद्र ने 20 जून 2024 को कटाव प्रभावितों के लिए नई गाइडलाइन मंजूर कर दी है और अब राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजना है। इधर, सांसद श्री अनवर का तर्क है कि जब तक केंद्र और राज्य की इस चिट्ठी-पत्री के खेल से बाहर निकलकर सीधे पीड़ितों तक मदद नहीं पहुंचती,तब तक ऐसे जवाबों का कोई अर्थ नहीं है। सवाल अब भी वही है आखिर इन विस्थापितों का स्थायी पुनर्वास कब होगा।गृह मंत्रालय का पक्ष रखते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पत्र में जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने नदी तटीय कटाव रोकने के लिए 1,500 करोड़ रुपये और विस्थापितों को दोबारा बसाने (पुनर्वास) के लिए 1,000 करोड़ रुपये का विशेष आवंटन किया है। इसके लिए 20 जून 2024 को नई गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है। केंद्र का कहना है कि वह राज्य सरकार के साथ काम करने को प्रतिबद्ध है। बस बिहार सरकार को इन निधियों के लिए विधिवत प्रस्ताव भेजना होगा। राज्य सरकारें ‘राज्य आपदा शमन कोष’ के जरिए भी सीधे काम कर सकती हैं।सांसद श्री तारिक अनवर ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी आंकड़े पेट नहीं भरते। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जून 2024 में ही नीति बन गई थी, तो पिछले कई महीनों में कटिहार के कितने परिवारों को जमीन या घर आवंटित हुआ? सच्चाई यह है कि महानंदा और गंगा के कटाव से गांव के गांव नक्शे से मिट रहे हैं, लेकिन प्रशासन प्रस्तावों और कागजी औपचारिकताओं में उलझा है। लेकिन जमीन पर पीड़ित आज भी बेहाल है। सांसद श्री अनवर ने चेतावनी दी कि जब तक विस्थापितों को जमीन पर घर नहीं मिलते, वे सरकार से जवाब मांगते रहेंगे और सरकार को जवाब देना होगा।

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