पैगंबर हजरत मोहम्मद के योम ए पैदाइश पर निकला जुलूस।
अशोक यादव (डडंखोरा)
पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के योम ए पैदाइश के मौके पर जुलूस ए मोहम्मदी का आयोजन किया गया। इस दौरान हाथों में इस्लामी झंडा, सिर पर सजा ईमामा, चेहरे पर पैगंबर साहब के योमें पैदाइश की दिली खुशी और फिजाओं में गूंज नूर की आमद मरहबा… आका की आमद मरहबा के नारे के साथ ईद मिलादुन्नबी के मौके पर मुस्लिम टोला डंडखोरा, सकरपुरा, हाजी टोला, सौरिया, भमरेली, मकुरजान से जुलूस ए मोहम्मदी निकाला गया। सभी जुलूस पीर मजार डंडखोरा पहुंची और सभा में तब्दील हो गई। जुलूस में रसूल के दीवानों ने काफी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान जगह-जगह हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आपस में गले मिलकर मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर एकता और सच्चाई का पैगाम दिया। मौके पर मौलाना सिकंदर रजा ने लोगों से कुरान ए पाक व नबी की सुन्नत के मुताबिक जिंदगी गुजारने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की कामयाबी के लिए दिन पर चलना होगा। उन्होंने तालीम पर जोर दिया। इसके बाद सलातो सलाम पढ़कर मुल्क व कौम के लिए दुआएं की गई।जुलूस की अगुवाई कर रहे हाफिज शमीम ने कहा कि दीन हमारी शक्ति है। ईमान है। नबी के संग हमारे देश की भी शान बुलंदियों को छूती है। बारहवीं शरीफ ही नहीं बल्कि हम हर एक कौमी जलसे को पूरी शिद्दत और रवायती रस्मों के साथ मनाते आए हैं। आगे भी इस सिलसिले को जारी रखेंगे। कहा कि आज के दिन आखरी पैगंबर इस दुनिया में तशरीफ लाए। नबी ने पूरी दुनिया को प्रेम और भाईचारे की तालीम दी। उनका जीवन सभी लोगों के लिए अनुकरणीय है। ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या प्रखंड के सभी मस्जिदों में जश्ने ईद ए मिलाद का आयोजन किया गया। वहीं जुलूस की व्यवस्था में जावेद अली, मुस्ताक आजम, कादीर खां, मोहम्मद तौफीक अहमद, हैदर अली, मिस्टर खान, शेख निहाल, फैयाज आलम सहित सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल रहे।
