राम कथा अमृत महोत्सव में हुआ भगवान राम का विवाहोत्सव वर्णन
Reporting by वी के रस्तोगी सीतापुर
जनपद के मिनी अवध कहे जाने वाले तहसील लहरपुर में वर्तमान समय में परम पूज्य भागवत कथा वाचक श्री प्रेमभूषण जी महाराज के श्री मुख से श्री राम कथा अमृत महोत्सव चल रहा है और इसमें प्रत्येक दिन नवीन से नवीन भागवत कथाएं एवं वेदों का ज्ञान तथा भगवान श्रीराम की अमृत कथाएं एवं लीलाओं का वर्णन किया जाता है उनके जीवन चरित्र का ज्ञान कौशल का गणों को सुनाया जाता है इसी कड़ी में प्रेमभूषण जी महाराज के द्वारा आज के दिन भगवान श्री राम और मैया सीता के विवाह का सुंदर वर्णन किया गया एवं उस वर्णन को सुनकर उपस्थित श्रोता गण जोर-जोर से भगवान श्री राम के जयकारे लगाते हुए मुग्ध होकर नाचने लगे। अधिक जानकारी देते हुए आयोजक समिति के श्री विभू पुरी जी ने बताया कि महाराज जी के श्री मुख से विवाह का वर्णन इस प्रकार है कि माता पिता के विवाह में बच्चों की फोटो नही दिखाई पड़ती है। जिनका नाम लेने मात्र से चारो पदार्थ करतलहस्तगत हो जाते है। वही प्रभु श्री सीताराम जी का यह पावन महोत्सव है आप तो बस आनन्द लीजिए दूल्हा सरकार,देवराज इंद्र, भोले बाबा, ब्रम्हा जी, कार्तिकेय स्वामी, खदानन्द जी सरकार बारात में कौन सम्मलित नही हुआऔर होना नहीं चाहता है इसकी गणना करना कठिन है।सभी सभी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान के श्री दूल्हा स्वरूप का दर्शन पा रहे है। आपकी आभा की छटा श्रंगार अदभुत है। ऐसा ऐष्वर्य किसी के जीवन मे हो तो उसको बहुभांति प्रसन्नता करनी चहिए ,निंदा कदापि न करनी चाहिए हम जब इस धरा धाम पर कोई ऐष्वर्य का दर्शन करते है तो पितरो का सम्मान होता है ।हर कुल में भगवान चौथी पीढ़ी में एक को भेजते है जिसका काम सिर्फ कमाना होता है खर्च उसके भेजे में नही होता है वो केवल डिपाजिट करेगा और दूसरी पीढ़ी उसका उपयोग कर पायेगी ओर तीसरी पीढ़ी उसको देखती है तो दोनों का सामंजस्य बना कर चलती है और चौथी पीढ़ी फिर निपटा- उपटा के चली जाती है और पांचवी पीढ़ी फिर बोरे पर नमक बेचती है ये जीवन की परंपरा है इसे कोई रोक नही पाता हम किस पीढ़ी में है वो तो हम स्वयं देख रहे है.ब्यय करना सरल नही है भगवान जिसको तप देते है ब्यय उसी से होता है यहां तो रिद्धि सिद्धि है यहां तो जो जिसकी इच्छा है वो पा रहा है । भगवान की बारात जब द्वार पर पहुँचती है नजर न लग जाए दूल्हे सरकार की लोग न्योछावर कर रहे है आहा वाह वाह अदभुत वर्णन, पूज्य श्री गुरुदेव के श्री मुख से लोग मंत्रमुग्ध होकर आनन्द ले रहे है, जैसे सभी के सभी बाराती है और सभी इस अदभुत विवाह के साझी होने वाले है।जो सेवक है उनको सन्तुष्ट करना चाहिए सेवक को देने की पृवत्ति रखिये स्वामी श्रेष्ठ बनने का प्रयास कीजिये दोनों समधी वाह वाह अदभुत क्षण.श्री सरकार का मंडप में प्रवेश हुआ है सरकार मंडप में पधारे है चारो और जयजयकार है रोमांचकता के चर्मबिन्दुओ को छू रहें है भगत गण अदभुत आनन्द है.मिथला में दूल्हा सरकार के द्वाराचार के समय ही बिटियारानी मंडप में पधारती है स्वयंम्बर के बाद ये विवाह की विधि है जिसको प्रभु ने सभी विधि से परिपूर्ण किया है.कथा पंडाल में उपस्तिथ भगत अपने आराध्य प्रभु के विवाह के दर्शन के परमसौभाग्यशाली हो रहे हैं। पिता के जीवन का एक सौभाग्य होता है पुत्र पुत्रवधु को एक साथ देखकर आनन्दित होना जो दशरथ जी इस समय हो रहे है पुलकित हो रहे है.सीताराम राम राम राम सीताराम राम राम राम.तब जनकराज महाराज से गुरु वशिष्ठ ने पूछा राजन आपके तो तीन बिटिया है तो हमारे वहां महाराज के भी तीन लाला है तो क्यो न उन सभी का विवाह संपन्न करवाया जाए मंडप एक विवाह चारो लालाओं का जय हो जय जय कार हो,आज मिथला नगरिया निहाल सखियां, चारो दूल्हा में बड़का कमाल सखियां,सम्पूर्ण कथा पंडाल के श्रोता झूमने लगे, मन प्रफुल्लित थे, चेहरों पर भावुकता थी माताओं के नेत्रों में खुशी के अश्रु थे अपने सरकार के विवाह उत्सव के साक्षी बनने को लेकर जय हो जय जय कार हो.न्यौछावर हों रहीं थी भगत मंडप के सन्निकट आकर अपने को नृत्य करने से रोक नही पा रहे थे शब्दो मे भाव समल्लित नही हो सकते उन छड़ो को देखने वाला है सरकार का विवाह चारो दूल्हा दुलहिन सरकार की जय हो आज के आनन्द की जय हो.विवाह के पश्च्यात सब लोग भोजन प्रसाद पा रहें है बारात एक महीने रुकी। नित्य नए व्यंजनों का प्रसाद पाकर बाराती भूल गए है कि वे मिथिला में है या श्री अवध में, इतनी खातिरदारी हो रही है नित्य बारात की विदा का आग्रह करते है जनक जी से पर उनके आग्रह पर नित्य विदा नही हो पाती बारात।अंततः राजा दशरथ के पुनः आग्रह पर बारात बिदा हुई और पहुँचे लाला अपनी नगरी में वाह क्या मनोरम दृश्य था चारो दूल्हा चारो दुल्हन के साथ चहुओर प्रेम, खुशी, उत्साह, आनन्द, का वातावरण जय हो जय जयकार हो पूज्य गुरुवर के श्री मुख से रसास्वादन कर रहे श्रोता आनन्दित हो रहे थे, झूम रहे थे, नृत्य कर रहे थे.आज राम कथा का चौथा दिन था कथा सुनकर श्रोता आत्ममुग्ध थे। कथा में प्रमुख रूप से विशाल कपूर, श्री नारायण मेहरोत्रा, जनार्दन मिश्रा , राकेश त्रिपाठी ,उमाकांत मिश्रा, शिवकुमार सिंह, वीरेन्द्र पूरी, राम नारायण त्रिवेदी, विभू पुरी महेश शर्मा आदि अनेक सामाजिक लोगो ने कथा का श्रवण किया।
