October 14, 2026

कटिहार न्याय सदन में बाल विवाह पर रोक विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

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किसी भी बच्चे का बाल विवाह करना अपराध है: जिला जज ।

प्रवीण कुमार (कटिहार)

कटिहार जिला विधिक सेवा प्राधिकार कटिहार सहयोग, राहत संस्था एवं जस्ट राइट कटिहार के तत्वावधान में व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित न्याय सदन में बाल विवाह पर रोक विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में व्यवहार न्यायालय कटिहार के वरीय अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता एवं पीएलभी ने भाग लिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के सचिव डॉक्टर फरजाना ने किया। संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रधान लिपिक आशीष झा ने किया। मुख्य अतिथि जिला सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार त्रिपाठी, अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार निशा कुमारी, किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश राम मनोहर चौधरी, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य अरुणा मजूमदार, कैलाश सत्यार्थी फाऊंडेशन नई दिल्ली के पदाधिकारी मोहम्मद फरहान रहे। संगोष्ठी में जिला अध्यक्ष जिला सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार त्रिपाठी,अवर न्यायाधीश और सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार के निशा कुमारी को संस्था के सचिव डॉक्टर फरजाना ने बुके, डायरी एवं शाल देकर सम्मानित किया। संस्था के विधिक सलाहकार प्रवीण कुमार झा ने किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश राम मनोहर चौधरी,सदस्य अरुणा मजूमदार को बुके, डायरी एवं शाल देकर सम्मानित किया। संस्था के परियोजना निदेशक नेहाल अख्तर ने विजय कुमार श्रीवास्तव,देव कुमार झा सहित अन्य अतिथियों को डायरी, बुके एवं साल देखकर सम्मानित किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राहत संस्था के सचिव डॉक्टर फरजाना ने राहत संस्था एवं जस्ट राइट कार्य पर विस्तार रूप से चर्चा किया। डॉक्टर फरजाना ने बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी पर उपस्थित विद्वान पैनल अधिवक्ताओं को जागरुक करते हुए बच्चों के सर्वोत्तम ही में विस्तार पूर्वक चर्चा किया। साथ ही सहयोग करने की अपील की। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार त्रिपाठी ने कहा कि राहत संस्था के द्वारा बाल विवाह पर रोक विषय पर संगोष्ठी के आयोजन से पैनल अधिवक्ता सहित बुद्धिजीवी वर्ग कई तकनीकी बिंदु का ज्ञान वर्धन हुआ है। इस तरह का आयोजन करने के लिए राहत एवं जस्ट राइट संस्था के पदाधिकारी की सराहना किया। इस तरह का जन जागरण अभियान चलने के लिए कहा गया। जिला सत्र न्यायाधीश श्री त्रिपाठी ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार के द्वारा भी बच्चों के सर्वोत्तम हित में कार्य कर रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यों की भी भूरी भूरी प्रशंसा किया गया। जिला सत्र न्यायाधीश श्री त्रिपाठी ने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की मूल प्रस्तावना यह है कि अनुच्छेद 2 (ए) के अनुसार किसी भी बच्चे का बाल विवाह करना अपराध है।18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र का लड़का बच्चा या नाबालिक होता है। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश राम मनोहर चौधरी ने बाल विवाह पर विस्तार रूप से चर्चा करते हुए उपस्थित लोगों को जागरूक करने का कार्य किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए अवर न्यायाधीश डीएलएसए सचिव निशा कुमारी ने कहा कि इस तरह का आयोजन करने से आम लोगों को बाल विवाह पर रोक लगाने की जानकारी मिलती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के द्वारा भी नियमित रूप से जन जागरण अभियान सहित बच्चों के सर्वोत्तम हित में कार्य करती है। जिसका लाभ समाज के हर तप के लोगों को सहजता पूर्वक मिल रहा है। इस तरह का आयोजन से आम लोग को समय-समय पर जन जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विधिक सलाहकार प्रवीण कुमार झा एवं पंकज कुमार झा ने कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुच्छेद 9 के तहत यदि 18 साल से अधिक उम्र का कोई पुरुष किसी आवश्यक बच्ची से विवाह करता है। तो उसके लिए सजा का प्रावधान है।बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुच्छेद 11(1) के तहत सभी स्थिति में 2 वर्ष तक के 100 श्रम कारावास या एक लाख रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है। संगोष्ठी को सफल बनाने में संस्था के निहाल अख्तर, मोहम्मद दानिश, बिपिन बिहारी यादव, माला कुमारी, सुमित कुमार,गौरव कुमार, हसन बानो, विनय कुमार सहित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के विजय शंकर झा का सहयोग अति सराहनी रहा।

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