October 6, 2026

देवी देवताओं के प्रतिमा निर्माण कार्य को युवक रोजगार के रूप में अपना रहे हैं।

Read Time:2 Minute, 34 Second

डडंखोरा (अशोक कुमार)

देवी देवताओं की प्रतिमा निर्माण का कार्य विशेष जातियों द्वारा किया जाता आ रहा है ।लेकिन समय के अनुसार यह काम विशेष जाति आधारित नहीं होकर एक रोजगार के रूप में देवी देवताओं की प्रतिमाओं का निर्माण कार्य बनता जा रहा है ।नई पीढ़ी के युवक प्रतिमा निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार के रूप में अपना रहे हैं। हिंदू देवी देवताओं की वर्षभर पूजा पाठ चलता है जिसको लेकर प्रतिमाओं की मांग भी होती रहती है। फिलहाल फरवरी माह के पहले सप्ताह में सरस्वती पूजा त्यौहार होना है। विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों ,विभिन्न कल्बो में सरस्वती पूजा का आयोजन होता है। जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिमाओं की मांग होती है। पश्चिम बंगाल की मूर्ति निर्माण कार्य करने वाले कलाकार निपुण माना जाता है। मिट्टी से प्रतिमा बनाने की कला एक पारंपरिक कला है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। यह कला ना केवल सुंदरता को दर्शाती है बल्कि यह सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को भी दर्शाती है। डंडखोरा प्रखंड के प्रेम नगर गांव के वार्ड संख्या चार के निवासी सोनू कुमार देवी देवताओं के प्रतिमा निर्माण कार्य को रोजगार के रूप में अपना कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि 3 वर्षों से पश्चिम बंगाल के रायगंज में रहकर मिट्टी से विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमा निर्माण कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। पिछले 5 वर्षों से अपने क्षेत्र में प्रतिमा निर्माण कार्य कर रहा हूं । देवी देवताओं के प्रतिमा को बनाने का काम रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। 

Previous post अनुमंडल स्तरीय खेती-बाड़ी कृषि क्लीनिक का शुभारंभ।
Next post डीटीओ ने चालान काटने के बाद चालकों को दिये कई दिशा निर्देश
Wordpress Social Share Plugin powered by Ultimatelysocial