छठ व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य डीएम एसएसपी सुरक्षा व्यवस्था का स्वयं कर रहे थे निगरानी
आदर्श श्रीवास्तव गोरखपुर
सूर्यदेव के आराधना का महापर्व सूर्य षष्ठी (छठ) बुधवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। वती महिलाओं ने अस्ताचल सूर्य का अर्घ्य देकर पुत्रों के लंबी उम्र की कामना की। राप्ती तट के रामघाट गोरक्षनाथ घाट गोरखनाथ मंदिर के भीम सरोवर मानसरोवर जटाशंकर पोखरा महेशरा डोमिनगढ़ मीरपुर राप्ती तट सहित जनपद के 390 स्थानों पर छठ व्रती महिलाएं डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर पुत्र की लंबी उम्र की कामना की जिलाधिकारी विजय किरन आनंद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ विपिन तरह सुरक्षा व्यवस्था का सभी घाटों पर पुख्ता व्यवस्था कर सुरक्षा व्यवस्था का बराबर भ्रमण करते हुये जायजा लेते रहे। राप्ती सहित अन्य घाटों पर व्रती महिलाओं की हजारों का हुजूम उमड़ा। अर्घ्य देने के बाद नदी में प्रवाहित किए दीपों का विहंगम दृश्य देखते ही बना।दोपहर बाद से ही नगर से लेकर ग्रामीण इलाके के श्रद्धालु सिर पर पूजा सामग्री लेकर नदी की तरफ चल पड़े। शाम होते-होते हजारों श्रद्धालु इकट्ठा हुए। छठ मईया का गीत गाती महिलाओं का समूह मनोहारी छटा बिखेर रहा था। आलम यह था कि तट पर तिल रखने तक की जगह नहीं बची। महिलाएं वेदी पूजन के बाद नदी में सामने खड़ी होकर सूर्यदेव के डूबने का इंतजार करने लगी। अर्घ्य के बाद कुछ महिलाएं अपने घर लौटीं तो कुछ कोसी भरने के लिए रात भर नदी तट पर जमी रहीं। राजघाट नदी तट भीम सरोवर मानसरोवर मंदिर जटाशंकर महेशरा डोमिनगढ़ मीरपुर आदि क्षेत्रों से छठ व्रती महिलाएं अपने पुत्र की लंबी आयु के साथ पूरे परिवार की मनोकामना के लिए सूर्यदेव की आराधना की ।श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ विपिन ताडा ने सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी। नदी की तरफ जाने वाले सभी मार्गो पर छोटे-बड़े सभी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था। जगह-जगह पुलिस के जवान तैनात थे। नदी तट पर सुरक्षा की कमान राप्ती नदी डोमिनगढ़ भीम सरोवर पुलिस अधीक्षक नगर सोनम कुमार संभाले हुए थे जिलाधिकारी विजय किरन आनंद के निर्देश पर नगर आयुक्त अविनाश सिंह राप्ती नदी भीम सरोवर जटाशंकर डोमिनगढ़ श्रद्धालुओं के लिए नदी तट तक पथ प्रकाश की व्यवस्था कराई गई थी। ग्रामीण इलाकों में लोक पर्व छठ पर घाटों पर महिलाओं का सैलाब पारंपरिक विधि-विधान से उल्लास पूर्ण वातावरण में अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के लिए महिलाएं घरों से नंगे पैर घरों से निकल पड़ीं। पूरब की संस्कृति की छटा बिखेरती पारंपरिक वेशभूषा में रंग-बिरंगे पीत वस्त्र धारी कपड़े पहन कर महिलाएं सिर पर पूजा सामग्री लिए घाट तक गईं। वेदी पर पूजन सामग्री रख सूर्य को अर्घ्य दिया। मन्नत पूरी होने पर कोसी भी भरने की तैयारी थी। पुत्र और पति के दीर्घायु के लिए व्रत भी रखा था। ऐसी मान्यता है कि संसार को प्रकाश से ऊर्जावान करने वाले सूर्य लोगों पर भी असीम कृपा करते हैं। व्रती महिलाओं के साथ बैंडबाजे डोल,नगाड़े बजाते लोग झूमते गाते घाटों की तरफ जा रहे थे। नदी तालाबों व पोखरी पर साफ-सफाई और विशेष प्रकाश व्यवस्था कराकर घाटों को पहले ही चाक चौबंद कर दिया गया था। इन घाटों पर तिल रखने की जगह नहीं थी। सभी घाट दीपमालाओं से सजे रहे। लोगों ने पोखरों व घाटों पर दीप दान भी किया।
