प्राथमिक विद्यालय दीधा पार के बच्चें पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर पढ़ने को है विवश
2007 से अब तक बिना भवन के प्राथमिक विद्यालय दीघा पार में संचालित हो रहा है।
राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य तल्लु वासकी ने किया निरीक्षण ।
प्रवीण कुमार (कटिहार)
प्राणपुर प्रखंड अंतर्गत केहूंनियां पंचायत के दीघा पार संथाली टोला में सरकारी विद्यालय भवन विहीन रहने के कारण छात्र-छात्राओं को पठन-पाठन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। आज भी इस विद्यालय के छात्र-छात्राएं पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर हर मौसम में पठन-पाठन करने को विवश हैं। इस विद्यालय में अब तक आधारभूत संरचना की घोर कमी है।विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनुरुद्ध कुमार राय एवं शिक्षिका रीता कुमारी ने बताया कि बिहार सरकार के द्वारा 2007 से प्राथमिक विद्यालय दीघा पार का अधिसूचना जारी किया है।अधिसूचना जारी होने के पश्चात विद्यालय संचालन के लिए शिक्षकों की नियुक्ति भी किया गया है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज तक विद्यालय को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है।प्रधानाध्यापक अनुरुद्ध कुमार राय एवं शिक्षिका रीता कुमारी ने बताया कि 2007 से 2015 तक गांव के एक चबूतरे पर विद्यालय का संचालन किया गया। 2016 से गांव के पटवारी मुर्मू के दरवाजे पर बांस के झाड़ी के नीचे आज तक विद्यालय का संचालन हो रहा है। जो हर मौसम में छात्र-छात्राओं को भीषण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। स्वर्गीय पटवारी मुर्मू की पत्नी जज्जी मुर्मू ने दरवाजे पर विद्यालय संचालन करने का सहमति से आज तक विद्यालय का संचालन हो रहा है।जज्जी मुर्मू के रसोई घर में बच्चे का मध्यान भोजन पकता है। जज्जी मुर्मू के ही चापाकल का पानी का उपयोग बच्चे करते हैं।जज्जी मुर्मू के शौचालय का उपयोग बच्चे एवं शिक्षक- शिक्षिकाएं करते हैं। विद्यालय के नाम पर मात्र चार-पांच कुर्सी तथा एक बेंच के सहारे बांस के झाड़ी के नीचे विद्यालय का संचालन 2016 से अब तक किया जा रहा है। इस विद्यालय में शिक्षक भानु प्रताप सिंह, लीलावती कुमारी, नीतू कुमारी, राधिका कुमारी नियुक्त है। प्रधानाध्यापक अनुरुद्ध कुमार राय एवं शिक्षिका रीता कुमारी ने बताया कि विद्यालय में 106 छात्राओं का नामांकन है। विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं को नियमित रूप से प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत भोजन कराया जाता है। लेकिन सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात यह है कि इस विद्यालय को अपना भवन अब तक नसीब नहीं हो पाया है।पिछले दिनों इस विद्यालय का हाल-चाल जानने के लिए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य तल्लु वासकी की पहुंचे थे। आयोग के सदस्य तल्लू बासकी ने विद्यालय का निरीक्षण किया। आयोग के सदस्य श्री बासकी ने निरीक्षण के क्रम में पाया कि दीघा पार गांव स्थित सरकारी विद्यालय गांव के में एक पेड़ के नीचे कई वर्षों से संचालित हो रहा है। आज तक इस विद्यालय को भवन नसीब नहीं हुआ है। इन्होंने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा की आजादी के बाद आज तक इस गांव में जहां अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र रहने के बावजूद भी शिक्षा विभाग के द्वारा आज तक विद्यालय को विद्यालय का रूप नहीं दे सका। इस बात को लेकर काफी अचंभित हुए। आयोग के सदस्य तल्लू बासकी ने एक भेंट में बताया कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी से विद्यालय में अब तक भवन नहीं बने के कारण की जानकारी के लिए तलब किया गया है कि आखिर किस परिस्थिति में विद्यालय में अब तक आधारभूत संरचना की व्यवस्था नहीं की गई है।
