संघ के आह्वान पर कोढ़ा के आंगनबाड़ी सेविकाओं ने अपनी मांगों को लेकर किया धरना प्रदर्शन ।
शाहजहां आलम (कटिहार)
बिहार राज्य आंगनबाड़ी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वाधान में शुक्रवार को समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय कोढ़ा के बाहर आंगनबाड़ी सेविकाओं ने अपने मानदेय बढ़ाने एवं अन्य मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन दिया । आंगनबाड़ी संघ के प्रखंड अध्यक्ष बिंदु चौरसिया के नेतृत्व में प्रखंड क्षेत्र के सभी सेविकाओं ने अपनी एक 21 सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया । मौके पर प्रखंड क्षेत्र के सभी सेविकाओं ने बताया कि समेकित बाल विकास परियोजना कार्यक्रम अंतर्गत कार्यरत आंगनबाड़ी सेविका सहायिका समाज में गरीबी रेखा से नीचे की जिंदगी गुजर बसर करने वाले परिवार के बच्चों को शिक्षा से पूर्व की शिक्षा देने और उसे कुपोषण से मुक्ति दिलाने के कार्य में लगी है । इनके काम का समय मात्र चार घंटा निर्धारित है परंतु केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न तरह के कार्यों में इन्हें लगाया जाता है । जो आठ घंटे में भी पूरा नहीं होता है। टीकाकरण, पल्स पोलियो, विटामिन ए, मलेरिया, फाइलेरिया, परिवार नियोजन आदि रोग से ग्रसित लोगों को बार बार चिकित्सा लाभ मुहैया कराना, स्वास्थ्य बीमा, जनगणना, विधवा पेंशन, चुनाव का कार्य, शौचालय निर्माण कार्य, कन्या सुरक्षा योजना, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, सभी प्रकार के सर्वेक्षण कार्य प्राथमिक विद्यालय में नामांकन बढ़ाने का कार्य, समाज में जागरूकता पैदा करने का कार्य लिया जाता है। यानी सरकार द्वारा सभी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने के कार्य में सेविका सहायिकाओं को भी लगाया जाता है। अब तो सभी काम डिजिटल करना पड़ रहा है। जबकि प्रारंभिक दौर में शिक्षा एवं उम्र को नजरअंदाज कर बहाली की गई थी फिर भी यह ममतामई महिला कर्मी महज मानदेय पर खटने को मजबूर हैं। इन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत मजदूरों या मनरेगा मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी के समान भी मानदेय राशि नहीं दिया जाता है। जो भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन एवं मानवाधिकार का घोर उल्लंघन है। सभी सेविकाओं ने कहा कि अत्यंत खेद जनक पहलू तो यह कि देश की अधिकांश राज्य सरकारें आंगनबाड़ी सेविका सहायिकाओं को केंद्र सरकार द्वारा दे मानदेय के अलावे अपने स्तर से एक जीवन अनुपयोगी अच्छा खासा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देती है। जबकि बिहार सरकार के द्वारा अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि ऊंट के मुंह में जीरा का फोरन के समान है। समान काम का समान वेतन तो महज दोहा कविता या शायरी बनकर रह गया है। हद तब हो जाता है जब हर अन्यत्र काम बगैर आदेश पत्र के डरा धमकाकर यहां तक की चयन रद्द करने की धमकी देकर कराया जाता है। यहां तो वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा मुख्य सचिव बिहार सरकार के आदेश का भी अनुपालन नहीं किया जाता है और मानवीय ढंग से उनसे काम लिया जाता है। आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं की हालत बंधुआ मजदूर जैसा है। मिनी आंगनबाड़ी सेविकाओं का काम दोगुना और मानदेय आधा उन्हें सहायिका का भी काम करना पड़ता है। सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं हो जाता है, तब तक सेविकाओं को 25000 एवं सहायिकाओं को 18,000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाए तो 54 दिन हड़ताल उपरांत 16 मई 2017 को हुए समझौते के आलोक में लंबित मांगों का निष्पादन शीघ्र किया जाए, सुप्रीम कोर्ट का आदेश के आलोक में बिहार में भी ग्रेच्युटी भुगतान करना सुनिश्चित किया जाए, आंगनबाड़ी विकास समिति द्वारा पारित वाउचर को ही मान्यता दी जाए तथा वाउचर समायोजन करने की अनिवार्यता से सेविका को मुक्त किया जाए, प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना का लाभ सेविका सहायिका को देना सुनिश्चित किया जाए, पोषाहार की राशि भी वास्तविक लाभुकों के लिए वर्तमान बाजार भाव से उपलब्ध कराई जाए समेत सेविकाओं एवं सहायिकाओं का 21 सूत्री मांग शामिल है । मौके पर प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों की संख्या में आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका मौजूद थी ।
