पूर्व विधायक के नेतृत्व में बिंद बेलदार चेतना की हुई बैठक ।
रतन कुमार ओझा (मनिहारी)
बिंद , बेलदार, नोनिया, केवट, निषाद समुदाय की भारत की प्राचीनतम एवं मूल निवासी हैं।सूबे मे निषाद समुदाय की जनसंख्या 14 प्रतिशत है,जिसमें बिंद बेलदार जाति 8 प्रतिशत है।विगत सात दशकों तक राजनीति मे इनका विभिन्न राजनीतिक दलों ने वोट बैंक के रुप मे इस्तेमाल किया। यह समुदाय आज भी सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टि भी हासिये पर है। इन्हें इनका अधिकार – न्याय दिलाने को लेकर पटना के गांधी मैदान मे पांच फरवरी को बिंद – बेलदार चेतना को लेकर सम्मेलन का आयोजन किया गया है।इस आशय की जानकारी बिंद विकास सामाजिक सेवा संस्थान एवं बिंद -बेलदार समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष गणेश कुमार ने दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष शुक्रवार को जिले के कुरसेला, बरारी, कटिहार प्रखंड मे बैठक कर मनिहारी स्टेशन के पीछे बिंद -बेलदार सम्मेलन मे भाग लेने को ले लक्ष्ति समुदाय का आह्वान करने पहुंचे थे।बैठक मे मुख्य अतिथि के रुप मे मनिहारी के पूर्व विधायक जनप्रिय समाजवादी नेता विश्वनाथ सिंह उपस्थित थे।अपने विधायक कार्यकाल मे श्री सिंह ने कुल देवता बाबा काशी की भव्य पूजा अर्चना कर निषाद समुदाय की विभिन्न उपजातियों मे बटे कुनबे को एक जुट करने का प्रयास किया था।अपने संबोधन मे श्री सिंह ने बिंद -.बेलदार समुदाय के लोगों से बड़ी संख्या मे पांच फरवरी को पटना मे आयोजित विशाल चेतना सम्मेलन व कुल देवता काशी बाबा के पूजनोत्सव मे भाग लेकर चट्टानी एकता प्रदर्शित करने का आह्वान किया।इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष गणेश कुमार ने बताया कि सम्मेलन के माध्यम से टुकड़े-टुकड़े मे बटे समाज को एकजुट कर जन चेतना लाना है।सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, आर्थिक रुप से हासिये पर खड़ी उक्त समुदाय को उनका हक दिलाना कार्यक्रम का उद्देश्य है।इनकी मांगों मे बिंद -बेलदार -नोनियाऔर केवट आदि निषाद समुदाय की जातियों को अनुसूचित जाति, जनजाति मे शामिल किया जाय।उक्त जातियों के गरीब ,भूमिहीन, विस्थापित, आवास विहीन परिवारों को आवास उपलव्ध कराया जाना, गरीब परिवारों व विधवा महिलाओं को प्रतिमाह पेंशन व मुफ्त अनाज उपलब्ध कराये जाएं। इस मौके पर संगठन के बाल्मीकि प्रसाद, शिव रतन प्रसाद, उपेन्द्र प्रसाद, दशरथ प्रसाद, विजय कृष्ण सिंह, बिंद सेना के राष्ट्रीय सचिव युवा नेता राज शेखर सिंह सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
