बिठूर में 52 घाटों पे श्रद्धा स्नान,मां गंगा की पूजा-अर्चना व घाट पर कथा श्रवण कर भक्तों ने मोक्ष के लिए किया दान।
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संवाददाता अनुज तिवारी
मंगलवार पौराणिक धार्मिक एवं ऐतिहासिक माने जाने वाली बिठूर नगरी के 52 घाटों पर श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी। कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर मां गंगा से अपनों की कुशलता की प्रार्थना की वही स्नान कर दान का भी प्रावधान माना जाता है कार्तिक मास के पर्व पर कानपुर से सटे बिठूर में लगभग 52 घाटों में भक्तों की उमड़ी भीड़ जहां सभी भक्तों ने माता के जयकारों के साथ गंगा स्नान किया आपको बता दें कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत से पृथ्वी वासियों को असुर का वध करके मुक्त कराया था।और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। वही भगवान शिव अपनी काशी धाम को लौटकर समस्त देवी देवताओं के साथ दीप प्रज्वलित कर दीपोत्सव मनाया इसलिए इसे देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इसी प्रथा को आज भी सनातन धर्म बड़ी श्रद्धा के साथ मनाता है इस दिन कई श्रद्धालु माता तुलसी और श्री हरि विष्णु के रूप शालिग्राम का विवाह भी कराया जाता है। लेकिन वहीं मंगलवार कार्तिक पूर्णिमा पर वर्ष का अंतिम चंद्रग्रहण पढ़ने से कुछ लोगों ने इसे कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व दिवस में ही मना लिया था,वहीं कुछ लोगों ने इसे कार्तिक मास मंगलवार को सुबह प्रातः काल में तुलसी और शालिग्राम की पूजा अर्चना के साथ विवाह संपन्न कराकर गंगा स्नान के लिए घाटों पर गंगा स्नान किया वहीं बिठूर के 52 घाटों में माता सीता के नाम पर सीता घाट के पुरोहित आचार्य अंकित तिवारी ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है इस दिन भक्त अपनी जो भी मन्नत भाव से आते हैं वह मां गंगा पूर्ण करती हैं। इस घाट का नाम माता सीता के नाम पर पड़ा है आपने बताया कि इस घाट पर माता सीता का परित्याग कर आ गया था इसलिए इस घाट का नाम सीता माता के घाट पर रखा गया। वही बिठूर में ब्रह्मावर्त घाट में आई महिला श्रद्धालु अरुणा मिश्रा ने बताया कि यह बिट्टू और डगरी ऐतिहासिक पौराणिक अलौकिक नगरी है यह ब्रह्मा कुटी भी है यहां ब्रह्मा जी ने तब करा था और इससे पृथ्वी की केंद्र भी कहा गया है वही इस पावन पर्व पर मनोकामना हो का पूर्णा होना संभव है और मां गंगा के स्नान से जन्मों-जन्मों की पाप मिट कर मोक्ष प्राप्ति होती है जिसे मोक्षदायिनी भी कहा गया है बिठूर नगरी यह पवित्र नगरी है पौराणिक कथाओं से सराबोर है यही महा ऋषि वाल्मीकि ने रामायण को पूर्ण किया था और लव कुश का भी बचपन बीता है वही माता सीता ने भी परिहर से आकर बिठूर में महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण प्राप्त करें और ऐतिहासिक रूप से नाना राव पेशवा जैसे क्रांतिकारी रानी लक्ष्मीबाई का बचपन भी इसी धरती पर है वही 52 घाटों में 1 घाट मन कनिका घाट भी इस बिठूर पौराणिक धरती पर विद्यमान है। वही समस्त श्रद्धालुओं ने मां गंगा के जयकारों के साथ गंगा में डुबकी लगाई और विश्व की कल्याण के लिए कामना की।
