शराबबंदी की उड़ा रहे धज्जियां: नशे में धुत अर्धनग्न प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी गिरफ्तार।
मध्य निषेध कानून के तहत मामला हुआ दर्ज करवाई में जुटी पुलिस।
कुर्सेला (राजशेखर जयसवाल)
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद सरकारी अधिकारी ही इस कानून की अवहेलना करते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला कटिहार जिले के समेली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया है, जहां तैनात प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार सिंह को पोठिया थाना पुलिस ने नशे की हालत में गिरफ्तार किया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉ. विनय कुमार सिंह अस्पताल परिसर के बाहर नशे की हालत में अर्धनग्न अवस्था में पड़े हुए थे। उनकी स्थिति ऐसी थी कि वे स्वयं खड़े होने या चलने में भी असमर्थ थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें उठाने और होश में लाने का प्रयास किया, लेकिन वे बेसुध रहे। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें अपने साथ थाने ले गई।स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। ललित कुमार नामक एक व्यक्ति ने बताया कि वे जन्म प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को नशे में धुत पाया। वहीं, पुलकित यादव सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।गौरतलब है कि इससे पूर्व भी उक्त चिकित्सा पदाधिकारी का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें महिला स्वास्थ्यकर्मी से चुम्मा मांगने का ऑडियो वायरल हुआ था । जो काफी सुर्खियों में रहा था। हालांकि उस समय भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।इस घटना की सूचना मिलने पर पोठिया थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया। थानाध्यक्ष नवीन कुमार ने बताया कि जांच में शराब सेवन की पुष्टि हुई है और उनके खिलाफ मद्य निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।इधर, प्रशासन ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉ. विनय कुमार सिंह को उनके पद से हटा दिया है। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ सिंह द्वारा जारी आदेश में उन्हें दायित्वों के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया है। उनके स्थान पर डॉ. कृष्ण कुमार यादव को समेली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नया प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।बता दे कि 11 फरवरी को जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने भी इस स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया था, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। उस समय भी संबंधित पदाधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया गया था।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करेंगे, तो आम जनता में कानून के प्रति सम्मान कैसे बना रहेगा।
