April 30, 2026

2017 की बाढ़ में ध्वस्त सड़क का फरवरी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो भूख हड़ताल पर बैठेंगे जिला परिषद ।

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तनवीर आलम (हसनगंज)

प्रलकारी बाढ़ 2017 में ध्वस्त सड़क का अबतक निर्माण नहीं होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला पार्षद मो शाहिद अख्तर की अगुवाई में सड़क निर्माण कराने की मांग करतें हुए रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ ग्रामीणों ने बिहार सरकार हाय हाय के नारे को बुलंद किया। प्रखंड के जगरनाथपुर पंचायत के नया टोला गांव चांपी पुल समीप दो प्रखंडों को जोड़ने वाली सड़क जो 2017 की बाढ़ में ध्वस्त हुई, जिसका तकरीबन छह साल बितने को जा रहे हैं बावजूद सड़क का अबतक निर्माण नहीं हो सका है। ध्वस्त सड़क के किनारे 500 मीटर की दूरी तय बालू व डायवर्सन से ही आवागमन जारी है। जिससे हमेशा बड़ी कोई दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। जान जोखिम में डालकर दो प्रखंडों के लोग आवाजाही करने पर मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन आंखों में पट्टी बांध मौन बरती हुई है। इस संदर्भ में जिला पार्षद मो शाहिद अख्तर ने बताया कि आज छह साल से लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने पर मजबूर हैं। आवाजाही दौरान अक्सर लोग घटना दुर्घटना के शिकार होते रहते हैं बताया बरसात के समय पानी ज्यादा हो जाने पर ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर बांस की चचरी का पुल बनाकर आवाजाही करते हैं। इस वक्त लोग बालू नुमा रास्ता होकर चलते जो बड़ी परेशानी है। जिला परिषद शाहिद अख्तर ने कहा कि सड़क निर्माण को लेकर प्रखंड मुख्यालय से लेकर जिला मुख्यालय और बिहार सरकार तक पत्राचार करते करते थक गए हैं, पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है बताया अगर फरवरी तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होगा तो प्रखंड मुख्यालय समीप भूख हड़ताल पर बैठेंगे। अभी वर्तमान में सड़क की स्थिति इतनी भयावह बनी हुई है कि लोग कटान के बगल से बालू नुमा पगडंडी होकर किसी तरह गिरते पछड़ते आना-जाना करते हैं। साथ ही आक्रोश जाहिर करते दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि आज जहां सरकार विकास का दावे करते थक नहीं रही है वही आज सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से हम लोग जूझ रहे हैं। ध्वस्त सड़क के कारण हम लोग आज जिल्लत भरी जिंदगी जीने पर मजबूर हैं। कहा कि कहने को तो देश में विकास हो रहा है पर शायद पिछड़े गाँव व कस्बे इस विकास की गति में कहीं पीछे रह गए हैं। विकास के नाम पर लगता करोड़ों का बजट और ऊपर से सरकारी वादें बहुत उम्मीदें जगाते हैं कि शायद अब तो ग्रामीण भारत में कुछ बदलाव होगा। शायद अब तो उन्हें सुविधाओं का महसूस करने का मौका मिलेगा। बस सब शायद में ही रह गया। शायद होगा, शायद हो जाता। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ कुछ और ही बयां है। ग्रामीणों ने आक्रोश जाहिर करते हुए जमकर बिहार सरकार हाय हाय के नारे को बुलंद करतें थक नहीं रहे थे। इस अवसर पर मो असफाक आदि दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।

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