April 29, 2026

साहित्यकार शब्द और अक्षर के प्रतिनिधि होते हैं- रवि प्रताप सिंह

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गया से आशीष कुमार की रिपोर्ट

शब्दाक्षर’, बिहार की जमीनी मासिक काव्य-गोष्ठी का भव्य शुभारम्भ शगुन गेस्ट हाउस, विष्णुपद, गया में हुआ, जिसमें बिहार राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिष्ठित कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कीं। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व कार्यक्रम का संचालन व संयोजन कर रही शब्दाक्षर की राष्ट्रीय प्रवक्ता-सह-प्रसारण प्रभारी प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी द्वारा प्रस्तुत पावन स्तुति पाठ व स्वरचित सुमधुर सरस्वती वंदना “ज्ञान दे, सुर तान दे, माँ शारदे वरदान दे” से हुआ। राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ रश्मि, बिहार प्रदेश अध्यक्ष प्रो मनोज कुमार मिश्र पद्मनाभ व प्रदेश उपाध्यक्ष संजय कुमार मिश्र अणु ने मंचासीन कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ रामकृष्ण मिश्र, प्रधान अतिथि सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द्र तथा विशिष्ट अतिथि डॉ सच्चिदानंद प्रेमी एवं कन्हैयालाल मेहरवार जी का स्वागत पुष्पगुच्छ प्रदान करके तथा माल्यार्पण करके किया। तत्पश्चात राष्ट्रीय प्रवक्ता ने शब्दाक्षर के संस्थापक-सह-राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह एवं बिहार प्रदेश प्रभारी अंतरराष्ट्रीय गीतकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र द्वारा शब्दाक्षर बिहार के लिए प्रेषित शुभकामना संदेशों को पढ़कर सुनाया।

आशीष प्रदाता डॉ बुद्धिनाथ मिश्र जी ने इस शुभारंभ को गौरवमय ऐतिहासिक कार्य बताते हुए डॉ रश्मि को शुभकामना स्वरूप “शब्दाक्षर रवि का सृजन अक्षय पात्र प्रताप, इस पर शंकर प्रेम की गहन कपूरी छाप। गहन कपूरी छाप, अवध से बंग अलंकृत। विष्णुकांत की वरद चेतना इसमें झंकृत। बुद्धिनाथ की रश्मि प्रवाहित मासिक निर्झर। सौरमास संक्रांति सदृश अपना शब्दाक्षर” स्वरचित पंक्तियाँ प्रेषित कीं। वहीं दिग्दर्शक रविप्रताप सिंह ने राष्ट्रीय प्रवक्ता, प्रदेश अध्यक्ष सहित शब्दाक्षर बिहार के अधिकारियों एवं उपस्थित काव्य अनुरागियों एवं साहित्यकारों को हार्दिक धन्यवाद देते हुए कहा कि शब्द एवं अक्षर ही शब्दाक्षर है तथा साहित्यकार शब्द और अक्षर के ही प्रतिनिधि होते हैं।प्रदेश अध्यक्ष प्रो मनोज मिश्र द्वारा प्रस्तुत स्वागत वक्तव्य के पश्चात मंचासीन अतिथियों एवं आमंत्रित कवियों ने मन और हृदय को छू लेने वाली स्वरचित रचनाएँ सुनायीं। कन्हैया लाल मिश्र की “तुमने ही चाहा था मुझको, तुमने ही आज भुलाया है” श्री सुमंत की महिला सशक्तीकरण पर रचित “घर की चाहारदीवारी में कैद कब तक रहोगी?”, खालिक हुसैन परदेसी की “दर्द की गाथा कहाँ जाके सुनाऊँ उनको”, अरुण हरलीवाल की श्रमजीवियों को समर्पित “वह उजाला मुक्ति वाला आम होता है नहीं”, डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’ की रचना “देश भर में शब्दाक्षर के हो गेल है नाम”, डॉ सच्चिदानंद प्रेमी की “गर्मी बहुत बढ़ी है”, सुरेन्द्र सिंह सुरेंद्र की “तपोभूमि इस बोधगया ने बुद्ध बनाया गौतम को”, प्रो मनोज मिश्र की समय जो ये आज आया है, कल चला जाएगा” तथा डॉ रश्मि प्रियदर्शनी के मुक्तक “मनुजता आज रोती है, दनुजता मुस्कुराती है, न जाने क्यों हमें हैवानियत इतना लुभाती है, निरख संसार की पीड़ा अगर छलके नहीं आँसू, दशा यह दुर्दशा है, सभ्यता हित आत्मघाती है” पर खूब वाहवाहियाँ लगीं।

काव्य गोष्ठी में सावित्री सुमन, खुशी भारद्वाज, अनामिका अनु, संजय कुमार मिश्र अणु, अनीला सिन्हा, महेश मिश्र मधुकर आदि ने भी अपनी स्वरचित रचनाएँ पढ़कर श्रोताओं को भावविभोर कर डाला। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ रामकृष्ण ने कार्यक्रम की सफलता पर खुशी जताते हुए शब्दाक्षर बिहार के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। ज्ञात हो कि काव्यगोष्ठी का सीधा प्रसारण “शब्दाक्षर फेसबुक केन्द्रीय पेज” से भी किया गया, जिसे हजारों दर्शकों ने अॉनलाइन भी देखा-सराहा। धन्यवाद ज्ञापन में राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों, मंचासीन अतिथियों, साहित्यकारों, श्रोताओं व मीडिया अधिकारियों, विशेष रूप से कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में सहयोग देने वाले डॉ नंदन कुमार सिन्हा समेत निशांत सिंह गुलशन, सागर शर्मा आजाद, कन्हैया लाल मेहरवार, पी के मोहन एवं अश्विनी कुमार के प्रति विशेष आभार जताया।वहीं उसी दिन शाम 6 बजे ‘शब्दाक्षर’ में सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक मृत्युंजय कुमार सिंह जी के साथ अॉनलाइन साहित्यिक वार्ता आयोजित की गयी, वार्ताकार संस्था पदाधिकारी नीता अनामिका थीं। श्री मृत्युंजय सिंह ने अपने प्रशासनिक, सामाजिक तथा साहित्यिक रोमांचकारी अनुभवों को साझा किया। पुलिस महानिदेशक ने साक्षात्कार के दरम्यान अपनी उत्कृष्ट स्वरचित रचनाओं का सुमधुर पाठ किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य उत्कृष्ट संस्कारों का संवर्द्धक है। शब्दाक्षर फेसबुक केन्द्रीय पेज से जुड़े रवि प्रताप सिंह, डॉ बुद्धिनाथ मिश्र, सत्येन्द्र सिंह सत्य, दया शंकर मिश्र, सुबोध कुमार मिश्र, श्यामल मजूमदार, महावीर सिंह वीर, ज्योति नारायण, वंदना चौधरी, राजीव खरे सहित अनेक दर्शकों ने इस साहित्यिक आयोजन का लाभ उठाया।

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