विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी स्थान रखती है— अपर महाप्रबंधक
प्रवीण कुमार (कटिहार)
पूर्व मध्य रेल के मुख्यालय, हाजीपुर में सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में हिंदी का महत्व विषय पर अपर महाप्रबंधक सह प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर अमित कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को एक विचार गोष्ठी संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि 14 सितंबर, 1949 को भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार्य किया गया था तब से प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी विश्व की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में अपना स्थान रखती है। जिस प्रकार भारतीय रेल सम्पूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करती है उसी प्रकार हिंदी सांस्कृतिक रूप से देश को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करती है. हम सबका दायित्व है कि भारत सरकार की राजभाषा नीति और भारतीय संविधान की आकांक्षाओं के अनुरूप दिन-प्रतिदिन के व्यवहार में ज्यादा से ज्यादा कार्य हिंदी में ही करें। इस अवसर पर महाप्रबंधक महोदय के संदेश का वाचन विसमुलेधि (एफ एंड बी) द्वारा किया गया. इसके साथ ही कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री अग्रवाल ने उपस्थित सभी रेल अधिकारियों और कर्मचारियों को राजभाषा संकल्प दिलवाया। मौके पर राजभाषा विभाग की पत्रिका दर्पण का विमोचन भी किया गया। वही वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. केकी कृष्ण ने कहा कि तकनीकी उपकरणों के सहारे सूचनाओं का संकलन, आकलन एवं उसकी प्रक्रिया के साथ-साथ संवाद को भी ग्रहण करती है। उन्होंने कहा की मन के विचारों की अभिव्यक्ति करना ही भाषा है और यह भाषा हिंदी रही है। इस भाषा में सूचना एवं प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंप्यूटर से आज हर क्षेत्र लाभान्वित होती है। सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में हिंदी ही वह भाषा है जो हिंदी का प्रचार-प्रसार करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है। इसके अलावा अन्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार ‘अंशुमाली’- हिंदी भाषा की विकास में रेल विभाग की भूमिका काफी अहम है। न्याय जगत में भी यह भाषा अपना अहम रोल अदा करती है। अगर इसी तरह की सक्रियता हिंदी के प्रति बनी रहे तो एक दिन हिंदी विश्व की भाषा बन जाएगी तथा विश्व के जनकंठ में अपना स्थान बना लेगी। कंप्यूटर के लिए हिंदी की वैज्ञानिकता सभी भाषाओं से अधिक है. भाषा मानवीय सभ्यता की संस्कृति है उसमें हिंदी का विशेष महत्व है। बैठक का संचालन करते हुए उप मुख्य राजभाषा अधिकारी सह उप विसमुलेधि/वित्त व बजट श्री अनुराग गौरव ने विभागाध्यक्ष एवं मंडलों से आये प्रतिनिधियों का स्वागत किया और कहा कि महाप्रबंधक महोदय के नेतृत्व तथा अपर महाप्रबंधक के मार्गदर्शन में पूर्व मध्य रेल पर राजभाषा का प्रयोग दिन-प्रतिदिन काफी समृद्ध हो रहा है।
