कटिहार में जूट खेती को फिर से बढ़ावा देने की पहल, आईसीएआर निदेशक ने किया दौरा
मनिहारी (रतन कुमार ओझा)
कटिहार जिले में जूट यानी गोल्डन फाइबर की खोई पहचान लौटाने के प्रयास तेज हो गए हैं। मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत केंद्रीय पटसन एवं समवर्गीय रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर के निदेशक डॉ. गौरांग कर ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर जूट खेती की संभावनाओं का आकलन किया।उन्होंने मनिहारी प्रखंड के मुजवर और गोगाबिल झील के आसपास की भूमि का निरीक्षण किया तथा किसानों से खेती में आने वाली कठिनाइयों की जानकारी ली। किसानों ने उत्पादन लागत, श्रम और बाजार संबंधी समस्याएं रखीं।डॉ. कर ने कहा कि प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग के कारण जूट की मांग घटी, जिससे किसान इससे दूर होते गए। उन्होंने बताया कि कटिहार की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु जूट उत्पादन के लिए उपयुक्त है। वैज्ञानिक तकनीक और सरकारी सहयोग से जूट की चमक फिर लौट सकती है।
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