April 24, 2026

हसनगंज में गरमा धान की खेती सीमित, मखाना की ओर बढ़ा किसानों का रुझान

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(डेस्क|हसनगंज)

हसनगंज प्रखंड क्षेत्र में इस वर्ष गरमा धान की खेती सीमित रकबे में ही देखने को मिल रही है। किसानों के अनुसार, इन दिनों तेज धूप और उमस भरी गर्मी धान की फसल के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है। धूप की तीव्रता बढ़ने से धान की बालियां तेजी से निकलती हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद रहती है। प्रखंड में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक लगभग 13 प्रतिशत धान की रोपनी ही हो सकी है। ऐसे में फसल की बेहतर देखभाल के लिए समय-समय पर निगरानी और उचित प्रबंधन जरूरी माना जा रहा है। इधर, किसान नगदी फसल की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। खासकर मखाना की खेती को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय किसान अब्दुल वाहिद, यासीन मियां, सीता राम महतो, दिनेश कुमार, राहुल कुमार, राकेश यादव, मुकेश कुमार, कल्पना देवी, गीता देवी और राधीया देवी ने बताया कि इस बार अधिकांश कृषि भूमि पर मखाना की खेती की गई है, जबकि धान का रकबा अपेक्षाकृत काफी कम रह गया है। इसकी मुख्य वजह मखाना से बेहतर आमदनी की संभावना है।किसानों का कहना है कि धान की खेती में अधिक मेहनत लगती है। पहले नई किस्म के धान का बीज बोकर बिचड़ा तैयार करना होता है, फिर खेत में पानी भरकर रोपनी की जाती है। इसके बाद समय-समय पर पटवन, उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल उमस भरी गर्मी का इंतजार है, ताकि धान में एक साथ बालियां निकलें और फसल समान रूप से विकसित हो सके।प्रखंड कृषि पदाधिकारी मनीषा यादव ने बताया कि गरमा धान के लिए उमस भरी गर्मी लाभदायक होती है और अधिक तापमान फसल के लिए अच्छा माना जाता है। उन्होंने कहा कि अब तक करीब 13 प्रतिशत रोपनी पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य खेतों में मक्का और मखाना की खेती की गई है।

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