डॉ भीमराव अम्बेडकर की जीवन दर्शन पर आधारित पुस्तक का हुआ लोकार्पण।
रतन कुमार ओझा (मनिहारी)
भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ भीमराव अम्बेडकर की 132 वीं जयंती के अवसर पर कन्या मध्य विद्यालय मनिहारी के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार के संपादन में डॉ भीमराव अम्बेडकर के जीवन दर्शन पर आधारित साझा संकलन ” युगद्रष्टा ” का लोकार्पण किया गया है । युगद्रष्टा साझा संकलन में देश के कोने कोने से ख्याति प्राप्त ग्यारह साहित्यकारों ने भाग लिया ! जिन साहित्यकारों ने ” युगद्रष्टा ” साझा संकलन में चार चाँद लगाने का कार्य किये, उनमें मुख्य मराठी, हिंदी के कथाकार,नागेश सू शेवालकर पूणे, महाराष्ट्र, उद्धव भयवाल महाराष्ट्र, डॉ सदानंद पॉल, मनिहारी कटिहार बिहार, प्रोफेसर डॉ रश्मि कृष्णन केरल, सुनिल कुमार बहराईच उत्तरप्रदेश, चतरसिंह गेहलोत मध्य प्रदेश, डॉ शुभा प्रशांत लोढ़े पूणे महाराष्ट्र, बाबूराव पाईकराव हिंगोली महाराष्ट्र, अशोक कुमार मनिहारी कटिहार, सुरंजना पाण्डेय बेतिया बिहार मुख्य हैं !इस अवसर पर साहित्यकार विनोद कुमार ने कहा कि बाबा साहेब की 132 वीं जयंती के अवसर पर ” युगद्रष्टा ” साझा संकलन लोकार्पित करते हुए अतिशय प्रसन्नता हो रही है ! पाठकगण इसे दिल से स्वीकार करेंगे, मुझे पूरी उम्मीद है ! साहित्यकार विनोद कुमार ने कहा कि बाबा साहब समता मूलक समान विचार धारा का एक नाम है ! विश्व बंधुत्व की वकालत करने वाले बाबा साहब सचमुच एक महान युगद्रष्टा थे ! जिसने बुद्ध, कबीर, एवं ज्योतिबा फुले को अपना आदर्श माना ।तीनों महान हस्तियों को अपना गुरु स्वीकार किये । जबतक बाबा साहब के बताये मार्ग का अनुशरण हम नहीं करेंगे, देश का विकास नहीं हो सकता ! जबतक समता मुलक समाज का निर्माण नहीं होगा, जात- पात, ऊंच नीच का भेद – भाव समाप्त नहीं होगा, भारत का राष्ट्रवाद मजबूत नहीं होगा ! संविधान देश की आत्मा है ! लोकतंत्र की कुंजी है । हम इसकी गरिमा को सुरक्षित रखें ।
