April 4, 2026

श्री 108 श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह पारायण के छठवें दिन बड़ी संख्या में भक्तगण लिया भाग

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श्री कृष्णा के बाल रुप वाले चित्र पर केक खिलाकर जन्म उत्सव मनाया बाल कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से पुतना को मार डाला : रविकांत शास्त्री जी महाराज।

प्रवीण कुमार, कदवा,(कटिहार)

प्रखंड के परभैली पंचायत अंतर्गत सुमित्रा सदन,रानीकोला में श्री श्री 108 श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह पारायण के छठे दिन बड़ी संख्या में भक्तगण भागवत कथा का श्रवण किया। भागवत कथा के छठवें दिन कृष्ण की बाल लीला तथा रुक्मिणी विवाह के बारे में विस्तार पूर्वक कथाकार पंडित श्री रविकांत शास्त्री जी महाराज ने विस्तार से चर्चा किया।इस अवधि में छठें दिन श्रीकृष्ण की बाल लीला पर आधारित झांकी ने भक्त जनों का मन मोह लिया। भागवत कथा के छठे दिन श्री कृष्णा बाल लीला के अवसर पर मंच पर पंडित रविकांत शास्त्री एवं आयोजक शंभू कुमार मंडल,आशा सुमन,सुनील कुमार मंडल, बबली कुमारी ने संयुक्त रूप से केक काटकर श्री कृष्णा के बाल रुप वाले चित्र पर केक खिलाकर जन्म दिन मनाया। केक काटने के बाद भक्त जनों के बीच के बीच वितरण किया गया। बच्चों के बीच गुब्बारे का वितरण किया गया। एक दूसरे को श्री कृष्णा बाल लीला की शुभकामनाएं भी दिया। आयोजन कर्ता तथा भक्तजन ने झूम झूम कर नृत्य कर बाल लीला की खुशी का इजहार कर किया। पंडित रविकांत शास्त्री ने कहा कि श्री कृष्ण की बाल लीलाएं गोकुल में उनके नटखट और दिव्य रूप को दर्शाती हैं, जिसमें माखन चोरी,मिट्टी खाना और यशोदा मैया को ब्रह्मांड के दर्शन कराना प्रमुख हैं। बाल कृष्ण ने पूतना वध, काल्यादमन और गोवर्धन पर्वत उठाने जैसी अद्भुत लीलाओं से असुरों का नाश किया और ब्रजवासियों की रक्षा की,जो प्रेम और भक्ति का प्रतीक हैं। पंडित रविकांत शास्त्री ने कहा किश्री कृष्ण अपने सखाओं के साथ गोपियों के घरों से माखन चुराकर खाते थे। वे न केवल स्वयं खाते, बल्कि बंदरों को भी खिलाते थे। यह लीला हृदय को शुद्ध करने और प्रेम वश भक्तों के पास आने की भावना को दर्शाती है।पंडित रविकांत शास्त्री ने कहा कि एक बार खेलते हुए कान्हा ने मिट्टी खाई। जब मैया यशोदा ने मुंह खोलने को कहा, तो उन्हें कृष्ण के मुख में पूरा ब्रह्मांड (सूर्य, चंद्रमा, तारे, पशु-पक्षी) दिखाई दिया। नटखट कृष्ण को तंग करने पर मैया यशोदा उन्हें ऊखल से बांधने का प्रयास करती हैं। भगवान प्रेम के वश में होकर बंध जाते हैं,जो यह दर्शाता है कि ईश्वर केवल प्रेम से ही बांटे जा सकते हैं।पंडित रविकांत शास्त्री ने कहा किइंद्र के घमंड को चूर करने के लिए,श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को भारी बारिश और आंधी से बचाया।पंडित रविकांत शास्त्री ने कहा किकंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना,जो कृष्ण को विषैला दूध पिलाने आई थी।उसे बाल कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से मार डाला। पंडित रविकांत शास्त्री ने कहा किश्री कृष्ण की ये लीलाएँ बच्चों के मन में प्रेम, साहस और ईश्वर के प्रति विश्वास पैदा करती हैं। वे यह भी सिखाती हैं कि ईश्वर निर्गुण होकर भी भक्तों के प्रेम के लिए सगुण रूप धारण कर सकते हैं।श्री श्री 108 श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह पारायण के आयोजन शंभू कुमार मंडल,आशा सुमन,सुनील कुमार मंडल, बबली कुमारी ने बताया कि कथा वाचक पंडित रविकांत शास्त्री जी महाराज के द्वारा रविवार से नियमित रूप से प्रतिदिन संध्या में कथा प्रस्तुत किया जाता है। कथा से पूर्व पंडित अंकित झा,अभिषेक झा, राजकिशोर मिश्रा के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा अर्चना की जाती है। कथा के समय म्यूजिक सेट पर श्रवण कुमार पेड,रामदेव नाल,सुमन कुमार अआरगन,भक्ति संगीत में अमृत राज, विभिन्न प्रकार के भक्ति पूर्ण झांकी में मनीष कुमार एवं छोटू कुमार शामिल है।

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