June 27, 2026

यूएस एम्बेसडर एवं एनसीपीसीआर के चेयरमैन ने की सरहाना ।

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पब्लिक न्यूज़ 24 (बारसोई)

कटिहार के लाल मो० छोटू का दिल्‍ली में सम्‍मान ।

समाज के लिए कुछ नया और अलग करने का जज्बा हो तो उम्र मायने नहीं रखती, बल्कि इसके लिए जोश, हिम्मत व जुनून होना चाहिए। बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले 22 साल के मोहम्‍मद छोटू इसकी जीती जागती मिसाल हैं। मोहम्‍मद छोटू पिछले 7-8 वर्षों से एक सक्रिय बाल अधिकार कार्यकर्ता के रूप में बाल मजदूरी, बाल दुर्व्यापार, बाल विवाह और बाल यौन शोषण के खिलाफ जनजागरूकता अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके इन्‍हीं प्रयासों की सराहना करते हुए भारत में अमेरिका के राजदूत ए. एलिजाबेथ जोंस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरमैन प्रियांक कानूनगो द्वारा सम्मानित किया गया। मौका था देश की राजधानी दिल्‍ली स्थित अशोका होटल में आयोजित ‘नेशनल कंसल्टेशन टू कॉम्बैट चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ कार्यक्रम का। सामाजिक संगठन शक्तिवाहिनी ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग(एनसीपीसीआर) के तकनीकी समर्थन और कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ), बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए), इंडिया चाइल्‍ड प्रोटेक्‍शन फंड(आईसीपीएफ) और प्रज्ज्वला के साथ साझेदारी में इस कंसल्‍टेशन का आयोजन किया था। कंसल्‍टेशन का उद्घाटन मुख्य अतिथि व नोबेल शांति पुरस्कार से सम्‍मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा दीप प्रज्‍जवलन के साथ किया। इसमें एनसीपीसीआर के अध्‍यक्ष प्रियांक कानूनगो, एनसीपीसीआर सदस्‍य सचिव रूपाली बनर्जी सिंह, राष्‍ट्रीय महिला आयोग की अध्‍यक्ष रेखा शर्मा, रेलवे सुरक्षा बल के पुलिस महानिदेशक संजय चंदर सहित अन्य प्रमुख गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।कभी खुद बाल मजदूरी का दंश झेल चुके मोहम्‍मद छोटू बाल मजदूरी, बाल दुर्व्यापार, बाल विवाह और बाल यौन शोषण के खिलाफ कई साल से काम कर रहे हैं। नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी द्वारा स्‍थापित ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ ने करीब एक दशक पहले मोहम्‍मद छोटू को बाल मजदूरी के दलदल से निकाला था। इसके बाद शिक्षा हासिल करते हुए वह समाज की मुख्‍यधारा से जुड़ा। बस यहीं से मोहम्‍मद छोटू ने अपने जीवन को बाल कल्‍याण के कार्यों के प्रति समर्पित कर दिया। कोरोना महामारी के बाद उत्‍पन्‍न हुईं स्थितियों में भी मोहम्‍मद छोटू ने बाल कल्‍याण के कार्यों को जारी रखा। उन्‍होंने अपने घर को विद्यालय में बदल दिया और बच्‍चों को निशुल्‍क शिक्षा देने लगे।

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