May 25, 2026

15 अगस्त को बंद रहती है शराब की दुकानें तो कहते है ड्राई डे, जानिए इसके पीछे का कारण ।

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आज देश आज़ादी का अमृत महोत्सव माना रहा है। 15 अगस्त हमारा राष्ट्रीय पर्व भी ऐसे में आज शराब की दुकानों को पूरे देश में बंद रखा जाता है। जिस दिन भी देश में शराब नहीं मिलती उस दिन को ड्राई डे ( DRY DAY ) कहते है। आज हम आपको बताने वाले है ड्राई डे के बारें में कि आखिर ड्राई डे कब होता है ,क्यों किया जाता है और इसका ड्राई डे नाम क्यों रखा गया।

कब होता है ड्राई डे?

देश में औसतन 21 दिन शराब की दुकाने बंद रहती है। जो अलग-अलग राज्यों के हिसाब से तय की जाती है। लेकिन मुख्य रूप से भारत में 2 अक्टूबर, 15 अगस्त और 26 जनवरी को ड्राई डे होता है। इसके अलावा हर राज्य अपने क्षेत्र में आने वाले त्योहार या किसी विशेष दिन पर शराब की बिक्री पर रोक लगाते हैं। जैसे कई राज्यों में रविदास जंयती के दिन शराब की दुकानें बंद रहती हैं, तो कई राज्यों में ऐसा नहीं होता है। राज्य और केंद्र की अलग-अलग एक्साइज पॉलिसी है और उसी के हिसाब से ड्राई डे की तारीख तय की जाती है। वहीं, जिन राज्यों में चुनाव होते हैं, तो वहां वोटिंग क्षेत्र में भी शराब की बिक्री पर रोक रहती है।

क्यों किया जाता है ड्राई डे घोषित ?

इस दिन को घोषित करने के पीछे कई वजह होती हैं। जैसे- अक्सर राष्ट्रीय पर्व या धार्मिक पर्व से जुड़े मौकों पर ड्राई डे घोषित किया जाता है। राष्ट्रीय पर्व पर सैनिकों, शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में और धार्मिक पर्व पर धार्मिक भावनाओं को लेकर शराब की दुकानें बंद की जाती है। इसके अलावा कई बार कानून व्यवस्था के चलते भी शहर या राज्य में ड्राई डे घोषित किया जाता है। जैसे कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान शराब की दुकानें नहीं खुलीं थी। ऐसा इसलिए किया गया ताकि कानून-व्यवस्था चुस्त रहे और लोग लॉकडाउन का पालन करें।

ड्राई डे नाम क्यों रखा गया?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वैसे तो इस दिन को ड्राई डे कहने के पीछे कोई तथ्यात्मक कारण नहीं है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि ड्राई शब्द का प्रयोग उस दिन के लिए किया जाता है जब कोई शराब का सेवन नहीं करता है। अंग्रेजी में इसे कहते हैं, He’s gone dry now. हालंकि, इसे एक आधिकारिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

भारत में इस शब्द की उत्पत्ति

भारत में सबसे पहले इस शब्द का उल्लेख 1926 में पंजाब के एक्साइज लॉ में किया गया था और बाद में केंद्र ने भी इसे 1950 में पूरे भारत में लागू किया था। तब से सरकारी डॉक्यूमेंट में भी ड्राई डे शब्द का ही इस्तेमाल किया जाता है।

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