हजारो श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डूबकी
रतन कुमार ओझा (मनिहारी)
गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मनिहरी गंगातट पर बड़ी संख्या मे श्रद्धालुओं व धर्मानुरागियों ने आस्था की डूबकी लगायी। दूसरे जिले सहित पड़ोसी मुल्क नेपाल से बड़ी संख्या मे आये श्रद्धालु ,धर्मानुरागियों ने पावन गंगा में डूबकी लगाकर सुखमय जीवन, आरोग्य जीवन की कामना की। गंगा किनारे पूजन अर्चन की। गंगातट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण मेले सा नजारा था ,तो गंगाघाट जानेवाली सड़को पर जाम की समस्या बनी रही।वैदिक मंत्रोच्चार, गंगा स्तुति मे गाये जानेवाले भजनों से गंगाघाट गुंजायमान रहा।इस धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से पापनाशिनी मां गंगा की पूजा अर्चना कर लोगों ने सुख शांति व समृध्दि की कामना की। यह पावन अनुष्ठान प्रत्येक ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा और गंगा जयन्ती के रूप मे मनाई जाती है।सनातन धर्म मे गंगा दशहरा का अपना विशेष महत्व है।इस दिन दान पुण्य से पितरों को शांति व तृप्ति मिलती है। इस पावन मौके पर गंगा स्नान व गंगा पूजन से अतीत के के सारे पाप धुल जाते हैं।ऐसी धार्मिक मान्यता है। रिध्द – सिध्दि,यश सम्मान की प्रप्ति होती है। ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।प्रचलित कथा के अनुसार राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने गंगा को धरती पर लेकर आये थे। उन्होंने अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने के लिए देवताओं से मदद मांगी थी, तब देवताओं ने उन्हें बताया कि गंगा मैया का पवित्र जल ही उन्हें मुक्ति दे सकता है। इससे प्रेरित होकर भागीरथ ने गंगा मैया को धरती पर लाने की कठोर तपस्या की।युगों बाद भगवान ब्रह्मा ने उन्हें भरोसा दिलाया कि धरती पर देवी गंगा अवतरित होगी और उनकी मनोकामना पूर्ण होगी। भागीरथ प्रयास से गंगा दशहरा के दिन मोक्षदायिनी मां गंगा अवतरित हुईं और राजा भागीरथ की मनोकामना पूर्ण हुई। तब से गंगा दशहरा के मौके पर गंगा स्नान ,गंगा पूजन ,आरती का विशेष धार्मिक महत्व रहा है ।प्रसाशन की ओर से इस अवसर पर विधि व्यवस्था चाक चौबंद रही।
