प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, दुर्गागंज बनेगा मॉडल अस्पताल
अस्पताल के संचालन में लगे रहते हैं स्वास्थ्य प्रबंधक व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक 2016 का हो रहा है पालन,अस्पताल की व्यवस्था से खुश हैं मरीज व उनके परिजन ।
प्रवीण कुमार(कटिहार)
कटिहार जिले के कदवा प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गागंज की कायाकल्प हो जाने से आम मरीजों को अब अस्पताल से निराश होकर वापस दूसरे अस्पताल में नहीं जाना पड़ रहा हैं। अस्पताल की व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। जिसके कारण कदवा प्रखंड के अलावे आसपास के दूर दराज इलाके से बड़ी संख्या में प्रतिदिन मरीज इलाज कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गागंज आते हैं। अस्पताल में इलाज बेहतर होने से अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट रहे हैं। इसका प्रभाव अस्पताल प्रबंधन पर सकारात्मक पड़ रहा है। यहां तक की इस अस्पताल में पूर्णिया जिले के ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी इलाज करने आ रहे हैं। अस्पताल का रखरखाव, अस्पताल की स्वच्छता सेवा व प्रावधान रोगियों के अधिकार, इनपुट, सहायक सेवा, रोग विशेषज्ञ सेवा में संक्रमण नियंत्रण, गुणवत्ता प्रबंधन, इन सारे बिंदु को लेकर 179 बिंदुओं पर बारीकी से मूल्यांकन किया जा रहा है। इस अस्पताल में राष्ट्रीय गुणवत्ता आवश्यकता अश्वासन मानक 2016 का अक्षरशः पालन किया जाता है। अस्पताल में लक्ष्य प्रमाणीकरण एवं एनक्वास के लिए कार्य कर रहे हैं।जिला से नियमित रूप से मॉनिटरिंग किया जाता है। *राष्ट्रीय स्तर के माणक पर ले जाने की तैयारी जोरों पर* राष्ट्रीय स्तर के माणक पर ले जाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गागंज के स्वास्थ्य प्रबंधक रवि रश्मि एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार सिंह के द्वारा कार्य किया जा रहा है। अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी के द्वारा नियमित मूल्यांकन एवं निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण रिपोर्ट से स्पष्ट हो रहा है कि यह अस्पताल राष्ट्रीय गुणबकता की सारी मानक को शात प्रतिशत पालन कर रहे हैं। इसलिए जिला कोचिंग टीम ने मॉडल अस्पताल के रूप में अनुशंसा किया है। जल्द ही यह अस्पताल मॉडल अस्पताल के रूप में कामयाबी हासिल कर जिले में कृतिमान स्थापित करेगी। अस्पताल में बेहतर सुविधा दी जा रही है। बड़े-बड़े शहरों के निजी अस्पताल में जिस प्रकार सुविधा दी जाती है, उसी तर्ज पर इस अस्पताल में सभी सुसज्जित तरीके से मरीजो का ख्याल रखा जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गागंज में पदस्थापित प्रभारी चिकित्सक डॉक्टर पंकज कुमार सिंह एवं स्वास्थ्य प्रबंधक रवि रश्मि ने संयुक्त रूप से बताया कि इस अस्पताल की स्थापना 1958 में की गई है।उस समय से लेकर 2018 तक आउटडोर, इंडोर, रोगी वार्ड, प्रसव गृह कम जगह में छोटे – छोटे जर्जर भवन में संचालित होते आ रहा था। जिसके कारण अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी सहित मरीज एवं मरीज के परिजनों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पर रहा था। उस समय मात्र अस्पताल में 6 बेड की ही सुविधा उपलब्ध था। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा.पंकज कुमार सिंह ने जुलाई 2016 में इस अस्पताल में योगदान किया। स्वास्थ्य प्रबंधक रवि रश्मि 23 फरवरी 2019 को योगदान किया। दोनों पदाधिकारी ने अस्पताल की स्थिति को देखकर काफी परेशान थे।दोनों अधिकारी ने मिलकर पुरानी व्यवस्था को परिवर्तन करने की दिशा में निरंतर कार्य करने में लग गये। *अस्पताल परिसर में नया भवन का हुआ निर्माण* जिसका परिणाम यह हुआ कि 2019 में अस्पताल परिसर में नया भवन का निर्माण हुआ। इस अस्पताल में टोटल 46 कमरे हैं। जिसमें सुसज्जित ओपीडी, इंडोर, प्रसव कक्ष, पीएनसी वार्ड, ट्राईएज कक्ष , नर्सिंग स्टेशन, मॉडल टीकाकरण कक्ष, परिवार कल्याण प्रमर्श कक्ष, युवा क्लिनिक, NCD क्लिनिक, पैथोलॉजिकल जांच घर, एक्सरे कक्ष, कोविड वार्ड, हीट वेव वार्ड, कुपोषित बच्चों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र एवं ऑपरेशन थिएटर में गुणवत्तापूर्ण कार्य प्रारंभ किया गया है। इस अस्पताल के नए भवन में मरीज के लिए 30 बेड की व्यवस्था की गई। ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने व्यवस्था को बनाए रखने में नियमित रूप से स्वास्थ्य कर्मियों के बीच क्लिनिकल बैठक, क्वॉलिटी सर्किल टीम की बैठक, BQAC की बैठक एवं विशेष गोष्टी, सेमिनार का आयोजन करते रहेते हैं।यहां तक की जिला स्तरीय स्वास्थ्य विभागीय समीक्षात्मक बैठक में भी इस अस्पताल की मुद्दों को उठाते रहे हैं।अस्पताल को व्यवस्थित करने के दिशा में आवश्यक प्रयास किया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार सिंह एवं स्वास्थ्य प्रबंधक रवि रश्मि ने बताया कि अस्पताल में मरीज आते हैं,तो सबसे पहले उनका ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाता है। रजिस्ट्रेशन के पश्चात चिकित्सक के द्वारा मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। आवश्यकता अनुसार उनकी जांच भी कराई जाती है। और चिकित्सक के द्वारा लिखे गए दवाई भी अस्पताल से मरीज को निःशुल्क दिया जाता है। मरीज की गंभीरता मरीज की रोगों की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में भर्ती भी किया जाता है। अस्पताल में सभी प्रकार की इलाज दवाई एवं जांच निशुल्क दिया जाता है। अस्पताल में भले ही चिकित्सक की संख्या कम हो लेकिन व्यवस्था सुढृय रहने के कारण मरीज को किसी भी प्रकार की कमी नहीं होती है। *अस्पताल में टीवी, एचआईवी, सीवीसी,एचसीवी, मलेरिया, कालाजार, डेंगू का होता है जॉच* प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा0 पंकज कुमार सिंह एवं स्वास्थ्य प्रबंधक रवि रश्मि ने बताया कि इस अस्पताल में टीवी, एचआईवी, सीवीसी,एचसीवी, मलेरिया, कालाजार, डेंगू,आईएसआर,यूपीटी, एसजीपीटी,एसजीओटी,केएफटी, लिपिड प्रोफाइल सहित अन्य बीमारी की जांच की जाती है। जांचोपरांत समुचित इलाज किया जाता है। *प्रसूता एवं बीमार नवजात शिशुओं की निशुल्क चिकित्सा की सुविधा* प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार सिंह एवं स्वास्थ्य प्रबंधक रवि रश्मि ने बताया कि अस्पताल में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम एक अभिनव योजना है। जो प्रसूता एवं बीमार नवजात शिशुओं की निशुल्क चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध है।प्रसूता के लिए भी निशुल्क प्रावधान है। प्रसव पूर्व जांच निशुल्क दवाई अन्य उपयोगी सामग्री, रक्त, पेशाब सहित अन्य आवश्यक जांच की जाती है। मरीजों को निशुल्क भोजन एवं परिवहन की व्यवस्था की जाती है।मरीज को घर से अस्पताल तक एंबुलेंस से लाया जाता है। प्रशव की जटिलता के कारण यदि मरीज को हाईयर सेंटर रेफर किया जाता है, तो मरीज को अस्पताल से हाईयर सेंटर तक एंबुलेंस से निशुल्क पहुंचने की व्यवस्था है। और हैइयर सेंटर में इलाज उपरांत मरीज को पुनः एंबुलेंस से घर तक छोड़ा जा रहा है। बीमार नवजात शिशु की 30 दिनों तक देखभाल निशुल्क रूप से किया जाता है। इस अवधि में उपचार, जांच, परिवहन की भी व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन के द्वारा किया जाता है। *अस्पताल में एचआईवी का भी इलाज किया जाता है* प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में एचआईवी का भी इलाज किया जाता है। अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 1884 पुरुष की जांच की गई। जिसमें सात पॉजिटिव पाया गया। 2075 महिलाओं की जांच की गई।जिसमें चार पॉजिटिव पाया गया। 6312 गर्भवती महिला की एचआईवी जांच की गई। जिसमें एक पॉजिटिव पाया गया। कुल 12 पॉजिटिव पाया गया है। गर्भवती महिला मरीज जो एचआईवी पॉजिटिव से ग्रस्त थीं उनका प्रसव सुरक्षित तरीके से अस्पताल में करवाया गया। जच्चा – बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। बच्चा नेगेटिव पाया गया और वह अपनी मां के साथ घर पर हैं। यहां कंफर्मेशन जांच भी होता है।एचआईवी के कार्य संचालन के लिए यहां एक पुरुष प्रामर्शी हैं और एक लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं। *टीवी रोग का भी सफल इलाज* टीवी रोग का भी सफल इलाज किया जाता है। जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक टोटल 529 मरीज की जांच किया गया। जिसमें माइक्रोबायोलॉजिकल पॉजिटिव -27, एक्स रे पॉजिटिव 106, कुल 133 पॉजिटिव पाया गया।जिसका नियमित रूप से उपचार किया जा रहा है और प्रत्येक मरीज का 6 माह तक फॉलोअप किया जा रहा है। फॉलो अप के रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि 75% मरीज उपचार के दौरान स्वस्थ पाया गया। परिणाम स्वरूप उपचार सफलता पूर्वक हुआ। *अस्पताल में नियमित टीकाकरण* प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पंकज डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में नियमित टीकाकरण की गुणवत्तापूर्ण टीकाकरण एवं संपूर्ण टीकाकरण से मालूम पड़ता है कि पूर्व में पूर्ण टीकाकरण 27% था और संपूर्ण टीकाकरण 32% था। लेकिन वर्तमान वित्तीय वर्ष में पूर्ण टीकाकरण 72 % एवं संपूर्ण टीकाकरण 68 % हो गया है। आरोग्य दिवश के 464 सत्र स्थलो पर सभी प्रकार की सामग्री स-समय उपलब्ध कराते हुए सत्र स्थल पर पहुंचने वाले सभी लाभार्थीयों का समुचित जॉच किया जाता है l प्रतिमाह 1052 लाभार्थी को लाभ मिल रहा है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत कुल 10,993 बच्चों को प्रतिवर्ष टीकाकरण लक्ष्य के विरुद्ध 9,872 बच्चों को टीकाकरण किया गया है। शून्य से 16 वर्ष की आयु के बच्चे बच्चियों को 12 जानलेवा बीमारी जैसे – टीवी, हेपेटाइटिस बी, पोलियो, गलघोटू, काली खांसी, हीमोफील्स इनफुलुंजा टाइप बी,निमोनिया, गंभीर दस्त रोग, मस्तिष्क ज्वर, खसरा,रूबेला का टीकाकरण दिया जाता है। *अस्पताल में अति कुपोषित बच्चों के लिए कार्यरत है 10 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र* प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, कदवा में शून्य से पांच वर्ष तक के कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के समुचित ईलाज एवं उनके पोषण पुनर्वास की व्यवस्था तथा उनके साथ रहने वाले माताओं को भी भोजन आवास एवं अधिकतम 21 दिनों तक 257 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से माताओं को प्रोत्साहन राशि (वेज एण्ड लॉस) का भुगतान भी उनके बैंक खाते में किया जाता है l नीति आयोग योजना के तहत 17 जुलाई 2023 से कार्यरत है l अभी तक कुल 123 कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों का सफ़लता पूर्वक सुपोषित किया गया है l *12,154 गर्भवती माता को प्रसव पूर्व चार जांच* प्रति वर्ष 12,154 गर्भवती माता को प्रसव पूर्व चार जांच किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें 10,995 गर्भवती माताओ को जांच के साथ – साथ दवाई भी दिया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल के क्षेत्रान्तर्गत अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र की संख्या सात है। उप स्वास्थ्य केंद्र की संख्या 35 है।अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र एवं उप स्वास्थ्य केंद्र में 23 को आयुष्मान भारत आरोग्य मंदिर के लिए अपग्रेड किया गया है।अस्पताल में नियमित रूप से दो एंबुलेंस कार्यरत है। अस्पताल में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के अलावे डॉ दीपक कुमार, डॉक्टर सुनीता कुमारी,प्रसव कक्ष प्रभारी रूबी कुमारी, कुमारी प्रेमलता उपाधाय जी एन एम,बीसीएम सुनील कुमार,जीएनएम बरखा कुमारी, श्वेता कुमारी,एएनएम रूबी कुमारी, प्रधान लिपिक रामानंद मिश्रा, डाटा आपरेटर राहुल कुमार देव, सहित 77 स्वास्थ्य कर्मचारी अपने-अपने कार्यों को ईमानदारी पूर्वक निर्वाहन कर रहे हैं।
