बलरामपुर विधानसभा में सभी समुदायों के क्षेत्र मे रोशन अग्रवाल एनडीए प्रत्याशी के रूप में कर रहे हैं दावेदारी मजबूत
प्रवीण कुमार(कटिहार)
समाजसेवा को ही जीवन का मूल मंत्र मानकर कार्य करने वाले बारसोई निवासी रोशन अग्रवाल आज जदयू व्यवसायी प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव बन चुके हैं। सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण वे न सिर्फ बारसोई बल्कि पूरे परिक्षेत्र में लोकप्रिय चेहरा बन गए हैं।रोशन अग्रवाल का जन्म 19 जून 1980 को बारसोई के व्यवसायी परिवार में हुआ। पिता स्व. जगदीश प्रसाद अग्रवाल एक प्रतिष्ठित व्यवसायी और माता बीना देवी गृहणी हैं। शिक्षा की शुरुआत सनसाइन स्कूल से हुई और 1995 में बारसोई उच्च विद्यालय से मैट्रिक उत्तीर्ण किया। बी.डी. कॉलेज से आईकॉम करने के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों से प्रभावित होकर राजनीति की ओर कदम बढ़ाया। बारसोई में ट्रांसफार्मर लगवाने से लेकर नगर पंचायत का दर्जा दिलाने तक उन्होंने लगातार जनता की आवाज उठाई। उनकी मेहनत और जुझारूपन का ही परिणाम रहा कि बारसोई को 2015 में नगर पंचायत का दर्जा मिला।समाज सेवा और पार्टी कार्यों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने हजारों लोगों को लोक शिकायत निवारण अधिनियम का लाभ दिलवाया। कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को सरकार तक पहुँचाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। दिल्ली एमसीडी चुनाव में जदयू प्रत्याशी के लिए सक्रिय प्रचार अभियान चलाया।राजनीति के साथ-साथ रोशन अग्रवाल सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े रहे। वे मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय संयोजक और अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन, बारसोई शाखा अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स की कार्यकारिणी में भी योगदान दिया है।पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने 2019 में मीडिया सेल में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। आज वे जदयू व्यवसायी प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव के रूप में संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।रोशन अग्रवाल कहते हैं, “मैंने हमेशा समाज और पार्टी के हित को सर्वोपरि रखा है। यदि एनडीए मुझे बलरामपुर विधानसभा से उम्मीदवार बनाती है तो इस सीट को जीतकर गठबंधन की झोली में डालना सुनिश्चित करूंगा।”बारसोई से लेकर पटना तक उनकी सक्रियता और लोकप्रियता चर्चा का विषय है। मुस्लिम बहुल क्षेत्र में भी उनकी गहरी पैठ है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर उन्हें 2025 विधानसभा चुनाव में मौका मिलता है तो यह सीट एनडीए के खाते में जाना लगभग तय है।
