प्रकृति पर्व सरहुल प्रतिक है भाईचारे का अटूट बंधन — संजय कुमार सिंह ।
तनवीर आलम (हसनगंज)
हसनगंज प्रखंड क्षेत्र के कालसर पंचायत अंतर्गत निराला हॉट समीप राजकीय बुनियादी विद्यालय खेल मैदान में सरहुल पूजा समिति नारियलबाड़ी कालसर की अगुवाई में भव्य सरहुल मेला का आयोजन किया गया।जिसमें आदिवासी समाज के लोगों ने बड़े धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ सरहुल पर्व पर प्रकृति की पूजा की। कई गांवों के आदिवासी समाज के बच्चे बूढ़े नौजवान अपनी टोली बनाकर पहुंचे। सभी ने अपने आराध्य देव की पूजा कर खुशहाली की कामना की। साथ ही आदिवासी समाज के महिला पुरुष एवं नौजवान संस्कृति के अनुरूप पूजा अर्चना कर ढोल नगाड़े के साथ खूब थिरके और परंपरागत रूप से सरहुल पूजा की। जिसको लेकर मेला अध्यक्ष गिरधारी उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज के आदिकालीन संस्कृति में प्रकृति को देवी मानने की परंपरा चली आ रही है। जिसके अंतर्गत गांव के प्राचीनतम बरगद वृक्ष को बूढ़ा महादेव एवं वृक्षों के समूह को सरना मानकर धरती, आकाश, बादल एवं प्राकृतिक माता की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके पीछे मान्यता यह है कि सरना देवता प्रसन्न होकर सुख समृद्धि व अच्छी फसल का वरदान देते है। बताया सरहुल पूजा चैत महीना बसंत ऋतु में होता है। इस दौरान वसंत ऋतु में खिलने वाले सभी फूलों खासकर सुखवा की फूलों की पूजा अर्चना की जाती है। सभी अपने चेहरे को फूलों से श्रृंगारती है. साथ ही युवक-युवतियों की टोली नृत्य पेश करते हुए बड़े ही हर्षोल्लास के साथ सरहुल पूजा की। एस स्वास्तिक एस ईट भट्टा के प्रोपराइटर संजय कुमार सिंह ने कहा कि गांव समाज में इस तरह के आयोजन होने से भाईचारे का अटूट बंधन बनता है। हर उम्र के लोग ढोल नगाड़े के साथ थिमक रहे है। लोगों में काफी उत्साह है पिछले साल की भांति इस साल भी आदिवासी समाज के लोगों ने सरहुल पूजा व मेला को सजाया है। इस अवसर पर मेला अध्यक्ष गिरधारी उरांव, सचिव कन्हैया उरांव, कोषाध्यक्ष हीरालाल उरांव, बासु देव उरांव, रामदयाल उरांव, कमेटी सदस्य में श्यामलाल उरांव, अरुण उरांव, मिरलाल उरांव, परसलाल उरांव, धनेश्वर उरांव,बचनदेव उरांव, बलराम उरांव, लालू, टोप्पो, बलवीर उरांव, बिनोद उरांव, हरिया उरांव, पूर्व समिति प्रमोद उरांव, रामजी उरांव, वरुन उरांव, मन्टू मंडल सहित ग्रामीण आदि मौजूद रहे।
