बरंडी नदी के कमलाघाट में फिर गई एक जान, नहाते समय पैर फिसलने से युवक की मौत
मो0 काजु (फलका)
फलका प्रखंड के मोरसंडा स्थित कमलाघाट नदी एक बार फिर दर्दनाक हादसे की गवाह बनी है। कुछ ही दिन पहले इसी घाट पर सावन की सोमवारी के दौरान तीन मासूम बच्चों की डूबने से मौत हुई थी और अब रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मामा के घर आए एक युवक की नदी में डूबकर जान चली गई। लगातार हो रही इन घटनाओं ने कमलाघाट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के अनुसार, भवानीपुर थाना क्षेत्र के सिंघिया गांव निवासी सोनू कुमार शर्मा (32) रक्षाबंधन के अवसर पर अपनी ममेरी बहन से राखी बंधवाने फलका प्रखंड के मोरसंडा गांव स्थित अपने ननिहाल आए थे। शनिवार सुबह करीब आठ बजे वह कमलाघाट नदी में स्नान करने गए। बताया जाता है कि स्नान के दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चले गए। देखते ही देखते वह नदी की तेज धारा और गहराई में समा गए।घटना की सूचना मिलते ही घाट पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने तत्काल खोजबीन शुरू की। काफी मशक्कत के बाद सोनू को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सूचना पर पहुंचे स्थानीय मुखिया राजू नायक एवं फलका प्रशासन की टीम ने आवश्यक कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल कटिहार भेज दिया। एएसआई राहुल कुमार सुमन ने कागजी प्रक्रिया पूरी की।मृतक सोनू कुमार शर्मा अपने पीछे पत्नी बेचनी देवी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। रक्षाबंधन जैसे खुशियों के पर्व पर हुई इस घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाने से पूरे गांव में शोक का माहौल है।गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सावन की तीसरी सोमवारी पर भी मोरसंडा के इसी कमलाघाट में बड़ा हादसा हुआ था। बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित करने पहुंचे सात बच्चे स्नान के दौरान गहरे पानी में चले गए थे। स्थानीय लोगों की तत्परता से चार बच्चों को बचा लिया गया था, लेकिन सत्यम कुमार (13), दिव्यांशु कुमार (11) और अमन कुमार (9) की डूबने से मौत हो गई थी। उस घटना ने भी पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था।लगातार दूसरी बार कमलाघाट में हुई मौतों के बाद ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि घाट पर चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी, गोताखोरों की स्थायी तैनाती और निगरानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हादसे बार-बार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से कमलाघाट को संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।कमलाघाट नदी में लगातार हो रही मौतों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक यह घाट लोगों की जान लेता रहेगा और कब प्रशासन यहां सुरक्षा के ठोस इंतजाम करेगा।
