हसनगंज में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर मांगी मन्नतें, आज उगते सूर्य की होगी पूजा
तनवीर आलम (हसनगंज)
हसनगंज प्रखंड क्षेत्रों में समृद्धि, पुत्र प्राप्ति व मंगलकामना के पर्व छठ पर रविवार की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। सोमवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा। प्रखंड में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। मौके पर कालसर छठ घाट में सूर्य देव भगवान की प्रतिमा स्थापित कर व्रती व उनके परिजनों ने पूजा अर्चना कर आशीर्वाद मांगा। और छठ वर्ती व परिवारजनों ने भी वर्ल्ड कप में भारत की जीत को लेकर भगवान भास्कर से की कामना। शाम होने से पहले ही व्रती तालाबों व नदियों पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पहुंचने लगे। लोगों ने कालसर पोखर, हसनगंज चापी, कोठी टोला, महनोर, पारा पोखर, ढेरुआ, सपनी, बलुआ, रामपुर आदि बने घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। जल में खड़े होकर सूर्य देव व छठ मैया की पूजा की। घाटों पर रंग बिरंगी झालरों से सजाया गया है। जिसने माहौल को और भी रंगीन बना दिया। बड़ी संख्या में छठ व्रती अपने पूरे परिवार एवं गाजे-बाजे के साथ छठ घाट पर पहुंचे। शाम को पूरे विधि-विधान से छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य एवं छठ माता की आराधना की। स्थानीय जनप्रतिनिधि व अन्य लोग भी व्रतियों को पर्व की शुभकामनाएं देने छठ घाटों पर पहुंचे। बताया गया कि सूर्य देव की उपासना का यह पर्व शुद्धता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला है। सूर्य देव के साथ-साथ छठी मैया की पूजा का विधान है। इस व्रत में सूर्य और षष्ठी माता दोनों की उपासना होती है। इसलिए इसे सूर्यषष्ठी भी कहा जाता है। दिन में छठी व्रतियों ने गेहूं, घी व शक्कर का ठेकुआ, चावल, घी और शक्कर का लड्डू प्रसाद के लिए बनाया। बांस के बने सूप डाला, दौरा, टोकरी में प्रसाद को रखा गया। इसके साथ ही प्रसाद के रूप में सेब, केला, अमरूद, नींबू सहित अन्य फल प्रसाद के रूप में रखे गए। मौके पर प्रखंड प्रशासन सभी छठ घाटों का जायजा ले रहें थे।
