June 24, 2026

गावों में मनी सोहराय पर्व थिमके ढोल नगाड़े के ताल पर, दी एक दूसरे को बधाई

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तनवीर आलम (हसनगंज)

हसनगंज प्रखंड के बलुआ संथाली गांव में आदिवासियों का बड़ी त्यौहार सोहराय पर्व के तीसरे दिन खुंटो की प्राकृतिक पुजा अर्चना किया गया। आयोजित पर्व छह दिन तक चलने वाले सोहराय पर्व के अवसर पर मांझी व नायके ने अपनी टीमों के युवक और युवतियों के साथ नृत्य पेश करते हुए संथाली भाषा में कई गीत संगीत पर प्रस्तुत किये। ढोल नगाड़े बजा कर दी एक दूसरे को बधाई। पंचायत के मुखिया कंदलाल मुर्मू व पूर्व पंचायत समिति प्रतिनिधि सदानंद तिर्की ने कहा कि हम आदिवासी समाज का सबसे बडा़ त्यौहार सोहराय पर्व है। सोहराय पर्व आदिवासी सभ्यता व संस्कृति का प्रतीक है। यह पर्व मवेशियों और मानव के बीच गहरा प्रेम स्थापित करता है। यह पर्व भारत के मूल निवासियों के लिए विशिष्ट त्योहार है। बताया भारत की आत्मा खेतीबाड़ी पर निर्भर करती है, इसलिए सोहराय पर्व में पशुओं को माता लक्ष्मी की तरह पूजा जाता है। इस दिन बैलों की पूजा कर किसान धन-संपत्ति की वृद्धि की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि सोहारय पर्व आपसी भाईचारा एवं प्रकृति से प्रेम को बढ़ावा देता है। सोहराय पर्व के मौके पर आदिवासियों ने अपनी सभ्यता संस्कृति की पूजा-अर्चना बडे़ ही धूमधाम से की। इस अवसर पर सैकड़ों आदिवासी समुदाय के महिलाएं व पुरुष मौजूद रहे।

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