फसल बचाने के लिए खेतों में दवा का छिड़काव शुरू, किसानों ने कृषि विभाग से मांगी उचित सलाह।
डेस्क (हसनगंज)
हसनगंज प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में खरीफ सीजन की धान की फसल में कीड़ों का प्रकोप बढ़ने से किसान परेशान हैं। खेतों में तैयार हो रही धान की फसल पर कीड़ों के हमले से पौधों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। फसल को बचाने के लिए किसान अपने स्तर से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने में जुट गए हैं। किसानों के अनुसार, धान के पौधों में कीड़ों का प्रकोप धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। कई खेतों में पौधों की पत्तियों और तनों पर कीड़ों का असर देखा जा रहा है। समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका सीधा असर धान की पैदावार पर पड़ सकता है। इसको लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है। किसान राहुल कुमार, प्रमोद यादव, श्रीलाल उरांव, संजय मंडल, बिनोद यादव आदि का कहना है कि खरीफ सीजन में धान की खेती पर ही बड़ी संख्या में किसान निर्भर रहते हैं। खेती में पहले ही बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कीटनाशक पर काफी खर्च हो चुका है। ऐसे में फसल में कीड़ों का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसान अपने स्तर से बाजार से दवाएं खरीदकर खेतों में छिड़काव कर रहे हैं। किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों से क्षेत्र में फसल की स्थिति का जायजा लेने तथा किसानों को कीड़ों की पहचान और उसके नियंत्रण के लिए उचित दवा एवं छिड़काव की मात्रा की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि बिना सही जानकारी के अलग-अलग दवाओं का इस्तेमाल करने से खेती की लागत बढ़ रही है और कई बार अपेक्षित परिणाम भी नहीं मिल पाता है। किसानों ने मांग की है कि कृषि विभाग की ओर से गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर धान की फसल में लगने वाले कीटों की पहचान, बचाव के उपाय और दवा के सही इस्तेमाल की जानकारी दी जाए।
