उत्क्रमित मध्य विद्यालय उफरैल में छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल ड्रेस में आते हैं
विधालय में चाहार दिवारी नहीं रहने से छात्र-छात्राओं को हो रही है परेशानी : गजेंद्र कुमार
प्रवीण कुमार, कदवा (कटिहार)
कदवा प्रखंड अंतर्गत सागरथ पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय उफरैल जाने आने के लिए सड़क नहीं रहने के कारण छात्र-छात्राओं सहित शिक्षक शिक्षिकाओं को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय से मुख्य सड़क तक आने के लिए कोई सड़क की व्यवस्था नहीं की गई है।गांव के मुख्य सड़क से विद्यालय के बीच खेत खलिहान एवं जंगल से भरा है। बरसात के मौसम में खेत खलियान जंगल में जल जमाव हो जाता है। जिस कारण आवागमन पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक गजेंद्र कुमार की ओर से कई बार विभागीय उच्च अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि को सड़क निर्माण करने के दिशा में ध्यान आकृष्ट किया गया है।लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाई गई है।विद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं नियमित रूप से पठन-पाठन करने के लिए आते हैं,लेकिन विद्यालय में मात्र दो कमरा ही कारगर है। शेष कैमरा खंडहर के रूप में परिणत हो गया है। जिसके कारण विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भी पठन-पाठन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापक गजेंद्र कुमार ने संबंधित उच्च अधिकारियों को विद्यालय परिसर में नए विद्यालय भवन कम से कम 07 कैमरा बनाने की दिशा में मांग की गई है। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस विद्यालय में वर्ग 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है,लेकिन पठन-पाठन के लायक मात्र दो कमरा ही है। जिसमें एक कमरा में कार्यालय का संचालन हो रहा है।विद्यालय में कार्यालय संचालन करने के लिए भी अतिरिक्त कमरा की व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण शिक्षक- शिक्षिकाओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विधालय में चाहार दिवारी नहीं रहने के कारण छात्र छात्राओं को सुरक्षा की दृष्टि से काफी परेशानी हो रही है। प्रधानाध्यापक गजेंद्र कुमार ने बताया कि विद्यालय में 199 छात्र-छात्राओं का नामांकन पंजी में दर्ज है। वर्ग एक में 21, वर्ग 2 में 10, वर्ग 3 में 34 वर्ग 4 में 21, वर्ग 5 में 23, वर्ग 6 में 37,वर्ग 7 में 30, वर्ग 8 में 23 छात्र छात्राएं हैं। विद्यालय में शौचालय 2 हैं।चापाकल दो हैं। विद्यालय 15 डिसमिल जमीन पर स्थित है। विद्यालय में 7 कमरे में 05 कमरे अति जर्जर हैं। प्रधानाध्यापक के रूप 01 जुलाई 2023 को इस विद्यालय में योगदान किये हैं। योगदान के पश्चात प्रधानाध्यापक गजेंद्र कुमार ने विद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए दिन-रात लगे रहते हैं। विद्यालय के शिक्षक मो0शकील अहमद,अजमीर आलम,जुली कुमारी, कृष्ण कुमार, कुमारी सपना,सुरभि समय पर विद्यालय पहुंचकर छात्र-छात्राओं को समय सारणी के अनुसार पठन-पाठन करते हैं। प्रधानाध्यापक गजेंद्र कुमार ने बताया कि अगर विद्यालय जाने आने के लिए सड़क का निर्माण हो जाता है, तो छात्र छात्राओं को काफी सुविधा होता। विधालय परिसर का चाहार दीवारी का निर्माण हो जाता,तो छात्र-छात्राओं को ठहराव के साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से अच्छा होता,दो शौचालय का निर्माण हो जाता तो छात्र छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक शिक्षिकाओं को बेहतर सुविधा मिल जाता,विद्यालय परिसर में समरसेबल की व्यवस्था हो जाता तो छात्राओं को पेयजल के लिए काफी सुविधा हो जाता।विद्यालय परिसर में मिट्टी भराई कर ईट सोलिंग हो जाने से हर मौसम में छात्र-छात्राओं को खेलने में काफी सुविधाजनक हो जाता। विद्यालय परिसर में काम से कम 6-7 नये कमरे की आवश्यकता है।नये कमरे बन जाने से वर्ग एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को पठन-पाठन के लिए सुविधाजनक हो जाता।
