May 25, 2026

प्राथमिक विद्यालय सिंगलपुर में बच्चों की किलकारी से वातावरण बना शैक्षणिक

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विधालय में 80 प्रतिशत छात्रों की होती है उपस्थिति विद्यालय का सर्वांगीण विकास करने के लिए कृत संकल्पित हैं:शैब्या कुमारी

प्रवीण कुमार(कटिहार)

ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में भी बच्चों की किलकारी से आसपास का वातावरण भी शैक्षणिक बनता जा रहा है। स्कूली ड्रेस में छोटे-छोटे बच्चे एवं बच्चियों सुबह अपने अपने घरों में उठकर समय से विद्यालय पहुंच जाते हैं। यह परिवर्तन बहुत ही खास माना जाता है। इस तरह का दृश्य कटिहार जिले कदवा प्रखंड के पहलागढ़ पंचायत अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय सिंगलपुर में देखने को मिला। सुबह 9:00 बजे से पहले छोटे-छोटे बच्चे एवं बच्चियों स्कूल पहुंच जाते है। बच्चे एवं बच्ची की पीठ पर कापी,किताब,कलम से भरा बैंग तथा गले में लाल रंग की पानी का बोतल टंगा हुआ सड़क पर चलते हुए स्कूल आने का नियमित रूटीन बन गया है। यह सब व्यवस्था को बहाल करने में प्राथमिक विद्यालय सिंगलपुर के प्रधानाध्यापिका शैब्या कुमारी का विशेष रूप से योगदान है। प्रधानाध्यापिका प्रत्येक दिन समय पर विद्यालय पहुंच जाती हैं। प्रधानाध्यापिका हाउस कीपर के द्वारा विद्यालय परिसर एवं शौचालय की नियमित रूप से सफाई करवाते हैं।सभी शिक्षक-शिक्षिका भी समय से पहले विद्यालय पहुंच जाते हैं। प्रधानाध्यापिका शैब्या कुमारी ने बताया कि विधालय में चेतना सत्र चलाया जाता है।चेतना सत्र में बच्चों को प्रार्थना, बिहार गीत,संविधान का प्रस्तावना, समाचार वाचक,प्रेरक प्रसंग, योगा,राष्ट्रीय गान सिखाया जाता है।प्रथम पाली में कक्षा का संचालन होता है। सभी छात्र-छात्राओं के बीच मीनू के अनुसार भोजन परोसा जाता है। दूसरी पाली में कक्षा का संचालन किया जाता है। उसके बाद कमजोर बच्चों को विशेष कक्षा का संचालन किया जाता है। प्रधानाध्यापिका शैब्या कुमारी ने बताया कि विद्यालय में 9 शिक्षक-शिक्षिका है।जिसमें विद्यालय संचालन में काफी सहयोग करते हैं। सभी शिक्षक-शिक्षिका आशा कुमारी, अनुप कुमार,इम्बसात फातिमा, मोहम्मद कैसर आलम, मोहम्मद मुस्ताक अहमद, अजहर हुसैन, रिजवाना फिरदौश,दीपा रानी शर्मा , रीना मंडल, शिक्षा सेवक मो0हूमायून,आशिया खातून, मो0 मुस्तकीम, मो0 शाकिर अंसारी, मो0 रियाजुद्दीन अंसारी समय पर विद्यालय पहुंचकर अपनी-अपनी जिम्मेवारी का बखूबी निर्वाह कर रहे हैं। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि विद्यालय में वर्ग 1 से 5 तक की पठन-पाठन की जाती है। विधालय में 524 बच्चे का नामांकन विद्यालय में है। जिसमें 80% बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुंचते हैं। विद्यालय 17 डिसमिल जमीन पर 5 कमरे का मकान है। सभी कमरे में पठन-पाठन किया जाता है। विद्यालय के छात्राओं को मध्यान भोजन मीनू के अनुसार प्रतिदिन दिया जाता है। मध्यान भोजन 6 रसोईया के द्वारा गैस चूल्हे पर भोजन पका कर परोसा जाता है। विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति के लिए प्रतिदिन प्रधानाध्यापक, शिक्षक के साथ गांव-गांव घूम कर बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए अभिभावक को प्रेरित करते हैं। सप्ताह में एक दिन अभिभावक और शिक्षक के साथ संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है। संगोष्ठी में बच्चों को विद्यालय भेजना तथा पठन-पाठन स्वच्छता पर विशेष रूप से चर्चा की जाती है।जिसके कारण छात्रों की उपस्थिति 80% बनी रहती है।प्रधानाध्यापिका ने बताया कि विद्यालय में सभी कक्षा में बिजली की व्यवस्था की गई है।सभी कमरे में बिजली पंखा लगाया गया है, ताकि गर्मी के मौसम में बच्चों को गर्मी से राहत मिल सके। प्रधानाध्यापिका अपने कार्य कुशलता के कारण बच्चों छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों से काफी घुल मिल गए हैं और विद्यालय का सर्वांगीण विकास करने के लिए कृत संकल्पित हैं। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि विद्यालय की स्थापना 1961 में की गई है।विधालय की साफ सफाई नियमित रूप से कराई जाती है। बच्चों को पेयजल के लिए चापाकल विद्यालय परिसर में लगाया गया है।विधालय में दो शौचालय बनाया गया है। विद्यालय में चारदीवारी का निर्माण किया गया है।विधालय के कमरा को बाल दृश्य कमरा बनाया गया। प्रधानाध्यापिका शैब्या कुमारी ने बताया कि विद्यालय का रंग रोगन किया गया। शौचालय का जीर्णोंद्धार किया। विद्यालय में बेंच डैक्स की व्यवस्था की गई। विद्यालय के सभी छात्राओं को नियमित रूप से सरकारी नियम अनुसार पोशाक राशि का वितरण किया जाता है। मेधावी एवं उपस्थिति के आधार पर छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जाती है। मासिक मूल्यांकन किया जाता है। बच्चों को समय-समय पर विद्यालय परिसर में खेल कराई जाती है, जबकि विद्यालय को अपना खेल का मैदान नहीं है। इसलिए बच्चों को परिसर में ही खेल की व्यवस्था की जाती है। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि विद्यालय में और भी कमरे की आवश्यकता है। रसोई भंडार कक्ष, शौचालय में प्लस, विद्यालय में बच्चों के लिए वास्तविक अवधारणा के रूप में प्रोजेक्टर टेलीविजन की आवश्यकता है। बच्चों के चौमुखी विकास के लिए खेल प्रांगण की आवश्यकता होनी चाहिए। विद्यालय में अध्यापक कक्षा होनी चाहिए। विद्यालय में पुस्तकालय होना चाहिए ताकि बच्चे क्लास के पश्चात पुस्तकालय में बैठकर विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन कर सके। विद्यालय परिसर में मिट्टी भराई के साथ-साथ सिमेंट का ईटसोलिंग या टाइल्स लगाने की जरूरत है। शिक्षकों के लिए शौचालय, कार्यालय कक्ष, बुक सेफ की व्यवस्था, प्रत्येक कमरे में चार-चार पंखे और बेंच डैक्स की आवश्यकता है। विद्यालय में मोटर पंप लग जाने से बच्चों को भोजन के पश्चात हाथ धोने में कारगर साबित होगा। बेसमेंट की व्यवस्था, बच्चों के भोजन करने के लिए सेड की व्यवस्था हो, कार्यालय संचालन से संबंधित अलमीरा, बक्सा आदि की व्यवस्था होने से बच्चों को और भी सुविधा मिल सकती है। प्रधानाध्यापिका ने कहा कि विधालय संचालन की व्यवस्था से छात्र तथा अभिभावकों में हर्ष व्याप्त है।

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