तरबूज के माध्यम से मिठास देने वाले किसान हताश व निराश।
गंगा कोसी नदियों के बीच में बसा हुआ यह दियारा क्षेत्र में बाहर के किसान आकर करते हैं खेती ।
उत्तर प्रदेश से लीज की करने के लिए किसान यहां बाहर से आकर-रहकर करते हैं खेती
कुर्सेला (राजशेखर जयसवाल)
कटिहार जिला के कुरसेला प्रखंड में कोसी गंगा नदी किनारे पर सैकड़ो एकड़ में तरबूज की खेती होती है, जहां किसानों को हर साल लाखों की आमदनी होती रही है । इस साल बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद हो गया । यहां के अधिकांश किसान तरबूज की खेती से जुड़े हुए हैं । ऐसा माना जाता है कि यहां का तरबूज दूसरे राज्यों के बड़े जिलों तथा कोलकाता , झारखंड के कई जिलों में भेजी जाती है । तरबूज की खेती से यहां हर साल किसानों को अधिक की आमदनी होती रही है, लेकिन इस बार यहां के किसानों को मौसम का मार झेलना पड़ा है । अब तक यहां के किसानों की एक रुपए की भी आमदनी नहीं हुई है ।पिछले कुछ दिनों से बिहार में हो रहे बेमौसम बारिश के कारण प्रखंड के किसानों को काफी खामियाजा उठाना पड़ा है । बताते चलें कि यहां लगभग नदी क्षेत्र वाले किसान तरबूज की खेती करते हैं । वहीं दूसरी ओर कुरसेला में तरबूज की खेती करने के लिए लोग उत्तर प्रदेश से भी यहां आकर लीज की खेती रहकर करते हैं। जिसमें कोई 10 बीघा कोई 5 बीघा तो कोई 10 कट्ठा खेती करता है.वही किसानों ने बताया कि तरबूज की खेती में हम लोगों को अच्छा मुनाफा हो रहा था । जहां 1 एकड़ में 50 से 60 हजार रुपए की आमदनी भी हो रहा था, लेकिन इस वर्ष मौसम के मार, यहां के किसानों को झेलना पड़ा और पूरा यह गांव दो नदियों के बीच बसा हुआ है । इस क्षेत्र में तरबूज का उपज भी बहुत बढ़िया होता है । किसानों ने बताया कि यहां का तरबूज काफी मीठा होता है और कई जिलों के बाजार में मांग के साथ सप्लाई होता है । वहीं किसानों द्वारा बताया गया कि इस बार हम लोगों को भाव नहीं मिल रहा है । मात्र 200 से 300 रुपया किवंटल अभी बाजार में बिक रहा है.
