May 30, 2026

मां के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए निरंतर नियम निष्ठा रहकर उपासना करनी चाहिये मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए नवरात्रि में नवमी के दिन माता का पूजन करना चाहिये, मां दुर्गा जी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं

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प्रवीण कुमार झा(कटिहार)

मां भगवती का परम सान्निध्य ही उसका सर्वस्व हो जाता है। इस परम पद को पाने के बाद उसे अन्य किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती। मां के चरणों का यह सान्निध्य प्राप्त करने के लिए हमें निरंतर नियमनिष्ठ रहकर उनकी उपासना करनी चाहिए। मां भगवती का स्मरण, ध्यान,पूजन, हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हुए वास्तविक परम शांतिदायक अमृत पद की ओर ले जाने वाला है।इनकी आराधना से जातक को अणिमा, लधिमा,प्राप्ति,प्राकाम्य,महिमा,ईशित्व, सर्वकामावसायिता,दूर श्रवण,परकामा प्रवेश,वाकसिद्ध,अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। आज के युग में इतना कठिन तप तो कोई नहीं कर सकता लेकिन अपनी शक्तिनुसार जप, तप, पूजा-अर्चना कर कुछ तो मां की कृपा का पात्र बनता ही है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना सरल है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए नवरात्रि में नवमी के दिन माता का पूजन करना चाहिए मां दुर्गा जी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है।अणिमा, लघिमा,प्राप्ति,प्राकाम्य,महिमा, ईशित्व,वाशित्व,सर्वकामावसायिता, सर्वज्ञत्व,दूरश्रवण,परकायप्रवेशन, वाक्‌सिद्धि,कल्पवृक्षत्व,सृष्टि, संहारकरणसामर्थ्य,अमरत्व,सर्वन्यायकत्व, भावना,सिद्धि है। शहर के पानी टंकी निवासी पंकज कुमार सिंह कहते हैं कि मां सिद्धिदात्री भक्तों और साधकों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में ‘अर्द्धनारीश्वर’ नाम से प्रसिद्ध हुए। कदवा प्रखंड के उप प्रमुख सीता देवी एवं शिक्षिका आरती कुमारी कहती हैं कि मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है। प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त करने का निरंतर प्रयत्न करें। उनकी आराधना की ओर अग्रसर हो।कदवा प्रखंड के पूर्व प्रमुख रवि कुमार साह एवं व्यवसायी पंकज कुमार साह कहते हैं कि इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। नवदुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं।भाजपा डंडखोरा मंडल के प्रभारी सह भर्री ग्राम निवासी धर्मेंद्र नाथ ठाकुर कहते हैं कि इन सिद्धिदात्री मां की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। सिद्धिदात्री मां के कृपापात्र भक्त के भीतर कोई ऐसी कामना शेष बचती ही नहीं है, जिसे वह पूर्ण करना चाहे। वह सभी सांसारिक इच्छाओं, आवश्यकताओं और स्पृहाओं से ऊपर उठकर मानसिक रूप से मां भगवती के दिव्य लोकों में विचरण करता हुआ उनके कृपा-रस-पीयूष का निरंतर पान करता हुआ, विषय-भोग-शून्य हो जाता है। कदवा प्रखंड के जदयू अध्यक्ष विजय दास कहते हैं कि नवरात्रा पुजन में नवें दिन का बहुत बड़ा महत्व है। महाष्टमी के बाद महानवमी पुजन कर कुमारी कन्याओं को भोजन कराने वाले को हर दृष्टि से लाभकारी होता है। कदवा प्रखंड के जदयू युवा अध्यक्ष राणा सिंह कहते हैं कि सनातन धर्म में नवरात्रि पुजन का बहुत बड़ा महत्व है। इसलिए नेम निष्ठा के साथ नौ दिन तक मनाते हैं।

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