किसानों के लिए ‘सोना’ बना काला धान, बंपर उपज से किसान किसानों की बदलेगी तकदीर
तनवीर आलम (हसनगंज )
हसनगंज प्रखंड के जगरनाथपुर पंचायत अंतर्गत बघुवाकोल स्थित एस स्वस्तिक एस ईट भट्टा संचालक सह किसान संजय सिंह ने स्वाद के साथ-साथ सेहत के गुणों की खान कहे जाने वाले काला धान की खेती कर चर्चा में है। किसान संजय सिंह इस बार एक एकड़ में काला धान की खेती किये है। उन्होंने कहा कि एक एकड़ भूमि में काला धान करीब 15 क्वांटल उपज हुआ है। यह काला धान की बीज यूपी से सम्पर्क कर ऑनलाइन मंगवाये थे। यह खुशबू दार चावल होता है। इस धान की चावल स्थानीय बाजार में अच्छा मांग है। 80 रुपये से लेकर 100 रुपये तक बिकने वाली चावल है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में खेती किया जाए तो अन्य धान के तुलना में यह काला धान अधिक उपजाऊ है। किसान संजय सिंह ने क्षेत्र के किसानों से अपील किया है कि सामान्य धान की खेती से हटकर यह काला धान की खेती बेहतर है। कम खर्च और जैविक खाद से बेहतर उपज होता है। और आंधी तूफान बारिश में यह धान लेट कर नुकसान नही हुआ। और हाइब्रिड धान लेट कर नुकसान हो जाता है। काला चावल स्वास्थ्यवर्धक गुणों की खान:काला धान की चावल एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर माना जाता है। इसमें कॉफी से भी ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। एंटी ऑक्सीडेंट हमारे बॉडी को डिटॉक्स और क्लीन करने का काम करता है और आज के प्रदूषित वातावरण और मिलावटी फुड से जंग लड़ने के लिए हर इंसान को इसकी आवश्यकता है। रोगियों के लिए काला धान कि चावल कमाल की चीज है। इस चावल के सेवन से पाचन शक्ति बढ़ने की बात कही जा रही है। इसकी खेती की सारी प्रक्रियाएं लगभग आम धान की खेती की जैसी ही है। हाइब्रिड धानों के मुकाबले कम खर्च की आवश्यकता होती है। इसके पौधों की हाइट लगभग सेम रहता है। यूरिया एवं अन्य उर्वरक के प्रयोग से पौधे और ज्यादा लंबे होने की संभावना रहती है। जैविक तरीके से काला धान की खेती काफी बेहतर होती है।
