किसानों को नहीं मिल रहा नलकूल योजनाओं की लाभ, किसानों में मायूसी
(हसनगंज डेस्क)
हसनगंज प्रखंड के कालसर पंचायत अंतर्गत चंदेली भर्रा गांव समीप बहियार में लघु जल संसाधन विभाग के द्वारा सिंचाई सुविधा को लेकर लगा राजकीय नलकूप से किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। महंगे डीजल खरीद कर खेत पटवन करने पर किसान मजबूर हैं। जबकि इन दिनों रबी फसल में किसानों को खेत पटवन करने पर काफी परेशानी हो रही है। हालांकि सरकार की ओर से जगह-जगह स्टेट बोरिंग नलकूप तो लगाया गया है, लेकिन देख रेख के अभाव में अधिकाश नलकूप बेकार पड़े हुए हैं। क्षेत्र में कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ की समस्या रहती है। कृषि उत्पाद बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से कृषि रोड मैप बनाई गई है। लेकिन कमजोर सिंचाई व्यवस्था किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है। किसानों को नलकूप योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। एक तरफ डीजल अनुदान को लेकर जोर दिया जा रहा हैं। दूसरी तरफ लाखों की लागत से बना नलकूप कई वर्षों से बंद पड़ा है। जो विभागीय अनदेखी के कारण कई जगह खंडहर का रूप धारण कर चुका है। जिसे देखने वाला कोई नहीं है। मौके पर किसान बिनोद यादव, अजय कुमार, संजय कुमार, राहुल कुमार, उमेश कुमार, आषुतोष कुमार आदि बताते हैं कि कई साल पूर्व सड़क किनारे बहियार में इस नलकूप को चालू किया गया था। लेकिन किसानों को सौ घंटा का भी पटवन लाभ नहीं मिल सका हैं। सिंचाई विभाग की यह योजना पूरी तरह फेल साबित हो रही है। जबकि सिंचाई को लेकर स्टेट बोरिंग का निर्माण किया गया था। कई बार विभाग से गुहार लगाई गई लेकिन आज तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं किया जा सका। जिस समय बोरिंग स्थापित की गई उस समय से यहां के किसानों को अच्छी उपज की उम्मीद था। वहीं इस सरकारी नलकूप से किसानों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। अभी गेहूं, मक्का व सरसों का पटवन करने हेतु उचित सिंचाई व्यवस्था का घोर अभाव है। निजी पंपिंग सेट वाले पहले सौ रुपए प्रति घंटे की दर से पैसा जमा कराते है फिर पानी पटाते है। पर सरकार की लाखों की लागत से बनाई गई नलकूप शोभा की वस्तु बनी हुई है। आज कई सालों से नलकूप बंद पड़ा हुआ है। इसे देखने वाला कोई नहीं है। आज किसानों की फसल सिंचाई के बिना सुख कर बर्बाद हो रहा है। जबकि क्षेत्र में किसानों को सुविधा मिले इसको लेकर नलकूप का निर्माण कराया गया था। जो आज बंद पड़ा है। जब की नलकूप बिजली और ट्रांसफार्मर से लैस है बावजूद चारों ओर जंगली जगलों का प्रकोप बढ़ गया हैं।
