काढ़ागोला घाट पर भव्य देव दीपावली, 5100 दीपों से जगमगाया पूरा तट
बरारी ( सुमन सोनी)
काढ़ागोला घाट पर इस वर्ष भी देव दीपावली का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें गंगा तट हजारों दीपों की मनमोहक रोशनी से जगमगा उठा। देव दीपावली का यह विशेष पर्व त्रिपुरासुर के संहार के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि जब त्रिपुरासुर नामक असुर ने तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था, तब देवाधिदेव महादेव ने उसका वध कर धर्म की रक्षा की थी। महादेव की इसी विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने काशी में दीप प्रज्वलित कर उत्सव मनाया था। तभी से गंगा के घाटों पर दीप जलाने की परंपरा चली आ रही है।इसी परंपरा के निर्वाह में गंगा समग्र द्वारा काढ़ागोला घाट पर लगातार चौथे वर्ष दीपोत्सव का आयोजन किया गया। पुरोहित प्रमुख दिवाकर झा एवं विभाष झा की अगुवाई में वैदिक विधि-विधान से माँ गंगा की पूजा-अर्चना की गई। पूजन उपरांत माँ गंगा की भव्य आरती संपन्न हुई। आरती के दौरान शंखनाद, घंटा-घड़ियाल की ध्वनि एवं “जय माँ गंगा”, “हर हर महादेव” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।जिला संयोजक नवीन चौधरी ‘बाबा’ एवं जिला सहसंयोजक मनोज साह ने बताया कि गंगा समग्र के स्वयंसेवक काढ़ागोला घाट की पहचान को पुनर्स्थापित करने तथा माँ गंगा के प्रति जनजागरण के लिए निरंतर सक्रिय रहते हैं। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 5100 मिट्टी के दीप जलाए गए, जिससे पूरा घाट प्रकाशमय हो उठा।कार्यक्रम के दौरान हरिशंकरी पौधों—बरगद, पीपल और पाखर—का रोपण भी किया गया। नवीन चौधरी ‘बाबा’ ने बताया कि धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से हरिशंकरी पौधा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। देव दीपावली के अवसर पर ऐसे पौधों का रोपण करने से घाट की हरियाली एवं आध्यात्मिक महत्व दोनों में वृद्धि होती है।इस भव्य कार्यक्रम में जिला सहसंयोजक जितेंद्र जायसवाल, मुख्य पार्षद बबीता यादव, उषा जायसवाल, किरण देवी, जीवछ गुप्ता, योगेश पाल, नवीन साह, राजकुमार साह, प्रवीण रिंकू, राजीव भगत, राणा सिंह, मनोज कुशवाहा सहित सैकड़ों स्वयंसेवक एवं श्रद्धालु उपस्थित थे। संपूर्ण घाट देर रात तक दीपों की रोशनी और भक्ति-भाव से सराबोर रहा।
