जनसंपर्क शंखनाद तेज हर दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं प्रत्याशीबरारी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल गरमाया, मतदाताओं तक पहुंचने की होड़ तेज
कुर्सेला (राजशेखर जयसवाल)
कटिहार जिले के बरारी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां इन दिनों चरम पर हैं। जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव-2025 की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों की जनसंपर्क गतिविधियां भी तेज होती जा रही हैं। हर राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण गलियों तक, प्रत्याशियों का डोर-टू-डोर अभियान लगातार जारी है। तरह-तरह के नुक्से अपनाएं जा रहे हैं।सुबह से देर रात तक उम्मीदवारों के काफिले गांवों और मोहल्लों में घूमकर जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए वे पिछले पांच वर्षों में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा पेश कर रहे हैं, साथ ही आगामी योजनाओं का वादा भी कर रहे हैं। वहीं, विपक्षी उम्मीदवार जनता के समक्ष सत्तारूढ़ दल के कार्यकाल की कमियों को मुद्दा बना रहे हैं।बरारी सीट पर मुकाबला एनडीए समर्थित प्रत्याशी विजय सिंह निषाद और महागठबंधन समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार तौकीर आलम के बीच कांटे का माना जा रहा है। तौकीर आलम को कांग्रेस से टिकट मिलने के बाद इस क्षेत्र में समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार हर वोट निर्णायक भूमिका निभाएगा।चुनावी माहौल अब केवल जनसभाओं और रैलियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह चौक-चौराहों और चाय की टपरियों पर भी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। लोग सुबह-शाम बैठकों में उम्मीदवारों के पक्ष-विपक्ष में तर्क दे रहे हैं। कहीं विकास की बात हो रही है तो कहीं जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दों पर बहस छिड़ी है।इस बीच, जनसुराज और बागी उम्मीदवारों की सक्रियता ने पारंपरिक वोट बैंक की गणित को और जटिल बना दिया है। हर दल के नेता अपने समर्थकों को एकजुट रखने और undecided वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।अब देखना यह होगा कि इस जनसंपर्क के महासमर में जनता किस प्रत्याशी के पक्ष में निर्णय सुनाती है, और मेहनत की इस दौड़ में बरारी की जनता का जनादेश किसके सिर जीत का सेहरा बांधता है।
