June 27, 2026

देवी आराधना की परंपरा आज भी कायम है ।

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रतन कुमार ओझा (मनिहारी)

चैती नवरात्र अष्टमी तिथि को मुख्यतः भोजपुरी भाषी महिलाओं द्वारा उपवास रखकर संध्या में कलश स्थापन कर नवरात्रि जागरण के साथ पूरी रात देवी की पूजा अर्चना एवं आराधना पूरे विधि विधान से करने की सदियों पुरानी परंपरा है। यह परंपरा आज भी कायम है।जिले सहित मनिहारी अनुमंडल में भी भोजपुरी भाषा भाषियों का एक बड़ा समूह निवास करता है जिसने अपनी इस परंपरा को छोड़ा नहीं है। अष्टमी तिथि की संध्या में पुरुष महिलाएं गंगा से कलश में गंगा जल भर कर लाती है और देवी स्वरूप स्थापना कर मंगल आरती और गीतों के साथ रात भर आराधना में रत रहती है। मनिहारी में भारी संख्या में इस व्रत का पालन करते हुए महिलाएं दिखी और भक्ति व श्रद्धा के साथ आराधना में लीन रही। देवी को दालपुरी और रसिया का प्रसाद भोग चढ़ाया जाता है और दूसरे दिन नवमी तिथि को इसे लोग ग्रहण करते हैं।

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