वीर बाल दिवस: साहिबजादा ज़ोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह की शहादत को देश करता है नमन
बरारी (सुमन सोनी)
बरारी प्रखंड के लक्ष्मीपुर पंचायत अन्तर्गत ऐतिहासिक गुरु द्वारा में वीर बाल दिवस मनाया गया।यह दिन सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्र साहिबजादा ज़ोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी की अद्वितीय शहादत को समर्पित है। इस दिवस का उद्देश्य देश के इन युवा नायकों की बहादुरी, साहस और बलिदान को सम्मान देना तथा आज की युवा पीढ़ी में सत्य, धर्म और आत्मसम्मान के लिए अडिग रहने की प्रेरणा देना है।इतिहास के अनुसार वर्ष 1704 में 26 दिसंबर को सरहिंद (वर्तमान फतेहगढ़ साहिब, पंजाब) में मुगल शासकों द्वारा साहिबजादा ज़ोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। लेकिन अल्पायु होने के बावजूद दोनों साहिबजादों ने अपना धर्म छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें जीवित ही दीवारों में चुनवा दिया गया, जिससे वे वीरगति को प्राप्त हुए। यह घटना भारतीय इतिहास में आस्था, साहस और नैतिक शक्ति का अमर उदाहरण बन गई।साहिबजादों की शहादत सिख गुरुओं की महान विरासत, उनके त्याग और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है। इतनी कम उम्र में भी इन वीर बालकों ने भय के आगे झुकने के बजाय सत्य और गरिमा के मार्ग को चुना। उनका बलिदान आज भी देशवासियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।वीर बाल दिवस के अवसर पर देशभर के गुरुद्वारों में विशेष प्रार्थनाएं, कीर्तन और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु साहिबजादों की शहादत को स्मरण कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। यह दिवस न केवल इतिहास को याद करने का अवसर है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त करने का संदेश भी देता है।
