कुरसेला में विराट शिव गुरु महोत्सव संपन्न, हजारों शिव शिष्यों की उमड़ी भीड़।
कुर्सेला (राजशेखर जयसवाल)
कुरसेला प्रखंड मुख्यालय स्थित स्टेट हाईवे 77 के हवाई अड्डा रोड के पास रविवार को एक दिवसीय विराट शिव गुरु महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हो गया। इस अध्यात्मिक आयोजन में कोसी, सीमांचल सहित बिहार, झारखंड, कलकत्ता तथा पड़ोसी देश नेपाल से हजारों की संख्या में शिव शिष्य एवं श्रद्धालु शामिल हुए।महोत्सव में शिव शिष्य परिवार के आलोक कुमार, प्रकाश मिश्र, आशेष कुमार आशीष, शिव कुमार विश्वकर्मा, दीदी बरखा आनंद एवं रामेन्द्र कुमार सिंह ने प्रवचन के माध्यम से शिव को जगत गुरु मानने का संदेश दिया। प्रवचनों के दौरान कन्हैया सिंह, परमेश्वर राय एवं अर्चित आनंद ने कहा कि वर्तमान दौर में महादेव को गुरु बनाकर ही लौकिक एवं पारलौकिक स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने साहब हरिन्द्रानंद एवं दीदी नीलम के बताए गए तीन सूत्रों पर चलने का आह्वान करते हुए प्रत्येक व्यक्ति को शिव शिष्य परिवार से जुड़ने का संकल्प दिलाया।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महादेव आप मेरे गुरु हैं और मैं आपका शिष्य हूं का उद्घोष किया। साथ ही प्रत्येक शिव शिष्य से ॐ नमः शिवाय मंत्र के जाप एवं हर घर में शिव चर्चा करने की अपील की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महेश्वर शिव के गुरु स्वरूप से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना बताया गया। आयोजन की शुरुआत शिव वंदना एवं भजन से हुई।महोत्सव में पधारे दीदी एवं भैया के स्वागत में शिव शिष्य आयोजन समिति के अध्यक्ष रवेंद्र कुमार रवि, सचिव आलोक कुमार, कोषाध्यक्ष सह शिव शिष्य अभय कुमार एवं उनके सहयोगियों की अहम भूमिका रही। मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनंद ने साहब हरिन्द्रानंद जी के संदेश को रखते हुए कहा कि शिव केवल नाम के नहीं बल्कि कर्म के गुरु हैं। उन्होंने कहा कि शिव जगत गुरु हैं और किसी भी धर्म, जाति या लिंग का व्यक्ति बिना किसी औपचारिक दीक्षा के शिव को अपना गुरु बना सकता है।दीदी बरखा ने बताया कि शिव शिष्य साहब हरिन्द्रानंद जी ने वर्ष 1974 में शिव को गुरु माना और 1980 के दशक तक शिव शिष्य परंपरा का व्यापक विस्तार हुआ। उन्होंने ज्ञान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बिना ज्ञान के संपत्ति भी घातक हो सकती है। वहीं रामेन्द्र कुमार सिंह ने शिव शिष्य के तीन सूत्रों की व्याख्या करते हुए उन्हें जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।महोत्सव में शिव के गुरु स्वरूप, उनकी शिष्टता, व्यापकता एवं प्रयोजन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का आभार एवं समापन संध्या दीदी के द्वारा किया गया। आयोजन में हजारों की संख्या में महिला एवं पुरुष शिव शिष्य शामिल हुए।कार्यक्रम को लेकर कुरसेला परिक्षेत्र में दिनभर चहल-पहल बनी रही। आयोजन स्थल के आसपास खाली मैदानों में वाहन खड़े रहे और दोपहर तक श्रद्धालुओं का झुंड कार्यक्रम स्थल की ओर जाता रहा। कार्यक्रम समाप्ति के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
