बरारी में मनरेगा कानून के विरोध में मजदूरों ने दिया घरना।
बरारी (सुमन सोनी)
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून को खत्म किए जाने तथा नाम का बदलाव किये जाने के विरोध में जन जागरण शक्ति संगठन ने संयुक्त रूप से सोमवार को सिक्कट पंचायत के दर्जनों मजदूरों ने कांग्रेस के नेता तौकिर आलम के नेतृत्व में बरारी प्रखंड मुख्यालय पहुंच कर घरना दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष मजदूर उपस्थित रहे।धरना को संबोधित करते हुए कांग्रेस के नेता तौकिर आलम ने कहा कि केंद्र सरकार ने संसदीय नियमों और लोकतांत्रिक परंपराओं को दरकिनार करते हुए आनन-फानन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलकर “विकसित भारत गारंटी रोजगार” कर दिया है, जिसका वे पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी मनमानी कर रही है और मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है। ।उन्होंने कहा कि बिहार में हर साल करीब 50 लाख परिवार और पूरे देश में लगभग 5 करोड़ परिवार मनरेगा के तहत काम करते हैं। इतने महत्वपूर्ण कानून को बिना व्यापक चर्चा और बहस के पारित कर देना मजदूरों के साथ अन्याय है। इससे पूरे देश के मजदूरों में भारी आक्रोश है।सभा को संबोधित करते हुए जयमंती कुमारी ने कहा कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून ने मजदूरों को 100 दिनों के काम का कानूनी अधिकार दिया था, लेकिन अब यह अधिकार छीना जा रहा है। नई योजना के तहत सरकार साल में दो महीने काम बंद रखने की बात कर रही है, जिससे गरीब मजदूरों की स्थिति और बदतर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य पर अब हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का बोझ डाला जा रहा है, जबकि पहले मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी। ऐसे में 100 दिनों का काम मिलना लगभग असंभव हो जाएगा।धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस के तौकिर आलम के अलावा राजद के विमल मालाकार, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष सिमरणजीत सिंह, मो. आलमगीर, अमरेन्द्र सिंह, संजू, फुलेश्वर ऋषि, जयमंती कुमारी, प्रियंका कुमारी, पूजा कुमारी, जोहन, खुशबू, सुनील परिहार, पवन कुमार, दल्लु ऋषि सहित सैकड़ों मजदूर शामिल हुए।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मनरेगा कानून को यथावत रखने, 100 दिनों का काम सुनिश्चित करने और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
