शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग —अनील
प्रवीण कुमार (कटिहार)
नये अध्यापक नियुक्ति नियमावली के अधिसूचित होने के साथ ही इसका विरोध भी जारी है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अध्यापक नियुक्ति नियमावली का कड़ा विरोध किया है।शिक्षक संगठनों की ओर से लगातार आंदोलन भी चलाया जा रहा है। कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस नियमावली को वापस लेने की मांग की है।इस बीच राइट टू एजुकेशन फोरम प्रांतीय के संयोजक अनिल कुमार राय एवं सह संयोजक राजीव रंजन ने मुख्यमंत्री पत्र लिखकर बिना शर्त सभी शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में फोरम ने कहा है कि शिक्षक के प्रति सम्मान हमारी सांस्कृतिक परंपरा भी रही है और यह सम्मान समाज के शैक्षिक सांस्कृतिक विकास के लिये आवश्यक भी है। पर जो शिक्षक दशकों से राज्य के विकास में निष्ठापूर्वक योगदान करते आ रहे है।उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया जाना और पुन: नये सिरे से आयोग की परीक्षा में ढकेला जाना किसी भी दृष्टि से न्याय संगत नहीं है। जबकि नियुक्ति के उपरांत उनकी योग्यता-दक्षता की परीक्षा पहले भी ली जा चुकी है।नये अध्यापक नियमावली से शैक्षिक वातावरण में अस्थिरता और ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न होगी, जो राज्य के लाखों बच्चों को प्रभावित करेगी। साथ ही इससे यह संदेश भी जाता है कि राज्य अपने शिक्षक कर्मियों के प्रति अविश्वास और पूर्वाग्रह से ग्रस्त है।यह आपके नेतृत्व वाली सरकार के सामाजिक न्याय और समानता के एजेंडे को खंडित करता है। समान काम के लिये समान दर्जा और समान वेतन केवल माध्यमिक शिक्षक संघ व अन्य शिक्षक संगठनों की पुरानी माँग ही नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय के रास्ते को मज़बूत बनाने का उपाय भी है।सीएम को लिखे पत्र उन्होंने कहा है कि नयी शिक्षक नियुक्ति नियमावली का प्रावधान केवल संवर्गीय विभेद को ही नहीं बढ़ायेगा।बल्कि उसके परिणामस्वरूप सामाजिक विभेद और ऊंच-नीच की परिस्थितियां और भी पुख़्ता होंगी। इसे बढ़ावा देना न तो अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप है और न ही राज्य के एजेंडे के अनुसार है।उन्होंने कहा है कि राइट टू एजुकेशन फोरम, बिहार इस विभेदकारी प्रावधान का विरोध करती है तथा सभी नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग करती है।
