राजवंशी जाति अपनी अस्तित्व को बचाने के लिए कर रहे हैं प्रयास।
बलरामपुर (जगन्नाथ दास)
टुनिदिधी – उत्तर दिनाजपुर जिला के अंतर्गत करनदिधी टुनिदिधी मीटदिधी की अंतर्गत में राजबंशी भाषा साहित्य संस्कृति के लेकर कार्यक्रम करके अपने संस्कृति और सामाजिक पिछड़ेपन से किया अवगत देश विदेश के राजवंशी कलाकारों ने अपनी कला प्रतिभा का दिखाया जलवा। राजवंशी समाज आज अपनी अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है, एक दिन ऐसा भी था जब जमीन जायदाद खेती बड़ी, फसल अनाज से संपन्न था लेकिन आज आर्थिक सामाजिक, राजनीतिक दृष्टि से पिछड़ा हो गया है, इसी को लेकर गाभूर संघ द्वारा बगिया भाबाइया उत्सव मनाया जा रहा है,, ये कार्यक्रम बलरामपुर के नजदीक बंगाल के मीरदिघी गाँव में मनाया गया,, लेकिन इस उत्सव में बंगाल के अलावा बिहार, नेपाल, असम के लाखो लोगों ने हिस्सा लेकर अपनी जाति के उत्थान के लिए साँस्कृतिक कार्यक्रम किए । इस उत्सव का आयोजक मोहन लाल सिन्हा ने कहा कि हमारी जाति कुछ साल पहले इतना संपन्न था कि जमीन जायदाद खेती फसल से भरा हुआ था,, लेकिन आज सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, राजनीतिक, साँस्कृतिक दृष्टि पिछड़ा हुआ है उन्होंने कहा कि इस उत्सव के जरिए जमीन बेचकर बेटी की व्याह को रोकना, पिछड़े परे लोगों को उठाना, अपनी भाषा कल्चर को जागृत करना, हमारा मुख्य उद्देश्य है, इस उत्सव को सबसे पहले बंगाल सरकार के शिक्षा मंत्री ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया,, उसके बाद असम, नेपाल, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग आदि कई जगह से आए राजवंशी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक राजवंशी भाबाइया गीत पेश की, और नृत्य का जलवा दिखाया,, कार्यक्रम में सैकड़ों मेहमानों को शॉल देकर सम्मानित किया वही संगीत जगत के गायक सुनील बर्मन को राजवंशी सम्मान से सम्मानित किया गया, इस उत्सव में बिहार बंगाल, असम नेपाल, और मेघालय के हजारों दर्शक पहुंचे।
