कुर्सेला में धुमधाम से मनाया वट सावित्री
कुर्सेला (राजशेखर जयसवाल)
पति की दीर्घायु और सेहत-नेमत की कामना को लेकर गुरूवार को कुरसेला प्रखंड की सुहागिनें बड़ी संख्या में वट वृक्ष के नीचे जुटीं। अपने सुहाग की सलामती की मनौती मांग यहां विधि-विधान से महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। कुर्सेला प्रखण्ड के अलग-अलग गांवों में अपनी मान्यताओं को जीवंत करने सुबह-सवेरे से ही विवाहिताओं का हुजूम वट वृक्ष के नीचे जुटने लगा।यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लौटाने के लिए यमराज को भी विवश कर दिया था। इस व्रत के दिन सत्यवान-सावित्री कथा को भी पढ़ा या सुना जाता है।वट सावित्री पूजन को लेकर कुर्सेला प्रखंड के टेंगरिया , महेशपुर , तीनघरिया , अयोध्यागंज बाजार सहित कई इलाके मे मंदिरों मे सुबह से ही सुहगिनों की देखने को मिली। वट सावित्री का दिन सुहगिनो के लिये विशेष दिन है। पति की लम्बी उम्र के लिये निर्जला व्रत रख कर सावित्री, सत्यवान, यमराज के साथ वट वृक्ष की पूजा करती है।क्यों की जाती है बरगद के वृक्ष की पूजा :-वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में बरगद का वृक्ष पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इस वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा शुभ मानी जाती है।__सावित्री छीन लाई थी यमराज से अपने पति के प्राण :-मान्याताओं की के अनुसार, ये व्रत देवी सावित्री ने पति के दिर्घायु होने के लिए किया था । वट सावित्री की कथा में इसका वर्णन है कि जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जा रहे थे, सावित्री उनके पीछे चली गई और यमराज के मना करने पर भी नहीं मानी, तो यमराज से उसे एक वर मांगने को कहा । जिसमें सावित्री ने यमराज से कुछ ऐसे वरदान मांगे, जिसके बाद यमराज उसके पति को अपने साथ नहीं ले जा सके । जिसके बाद से ही महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखती हैं ।
