करमा-धरमा पूजा में उमड़ा आस्था का सैलाब, मंदार की थाप पर रातभर झूमे ग्रामीण
डेस्क (हसनगंज)
प्रखंड अंतर्गत कालसर पंचायत के रामपुरकोशपाली तिनगाछिया गांव के वार्ड संख्या 04 में पारंपरिक करमा-धरमा पूजा का आयोजन श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ किया गया। पूजा को लेकर गांव में दिनभर उत्सवी माहौल बना रहा। शाम होते ही पूजा स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन विधायक प्रत्याशी सौरभ कुमार अग्रवाल, पूर्व मुखिया राजेंद्र उराँव, पूर्व मंडल अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद मंडल, पूर्व प्रमुख प्रमोद उराँव सहित गांव के सम्मानित लोगों ने फीता काटकर किया। इस दौरान अतिथियों ने करमा-धरमा पर्व की परंपरा और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। मौके पर पूर्व मुखिया राजेंद्र उराँव एवं पूर्व प्रमुख प्रमोद उराँव ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी दसकर्मा के अवसर पर करमा-धरमा पूजा का आयोजन किया गया। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, आपसी सद्भाव और परिवार की सुख-समृद्धि से जुड़ी महत्वपूर्ण पारंपरिक मान्यता का प्रतीक है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना को लेकर व्रत रखती हैं। पूजा की विशेष परंपरा के तहत जावा रखा जाता है, जिसमें सात प्रकार के अनाज को मिलाकर उसके अंकुर उगाए जाते हैं। इसके बाद करम वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीणों के अनुसार करम पूजा के माध्यम से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलता रहा। मंदार की थाप और पारंपरिक करमा गीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय हो उठा। युवा-युवतियों ने पारंपरिक गीत-संगीत पर देर रात तक नृत्य किया। ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान पूरा गांव करमा पर्व के रंग में सराबोर नजर आया। करमा-धरमा पूजा के आयोजन ने ग्रामीणों की पारंपरिक संस्कृति, लोक आस्था और आपसी भाईचारे की जीवंत तस्वीर पेश की। बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक सभी में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया। इस अवसर पर राजकुमार उराँव, शिकन्दर उराँव, पवन उराँव, जयकुमार उराँव, पिंटू उराँव, राजीव उराँव, दिलीप उराँव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
