कटावरोधी कार्य का कुछ भाग धंसा मौके पर विभागीय अभियंता मुस्तैद।
रतन कुमार ओझा (मनिहारी)
मनिहारी गांधीटोला के पास गंगा किनारे बाघमारा घाट से लगभग दो किलोमीटर दूरी तक गंगा की रौद्र रूप से बचाने के लिए कटावरोधी कार्य करोड़ों की लागत से कराये गये ।इसके पूर्व के वर्षों में भी सौ करोड़ से अधिक लागत से इसी स्थान पर कटावरोधी कार्य कराये गये थे जो गंगा की भीषण कटाव की भेंट चढ़ गया।जब बाघमारा एवं गांधीटोला सहित महज कुछ मीटर की फासले से गुजर रही मनिहारी कटिहार रेलवे ट्रैक पर कटाव के खतरे मंडराने लगे तो राज्य सरकार की निद्रा भंग हुई।सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार , जलसंसाधन मंत्री संजय झा एवं जल संसाधन विभाग के आलाधिकारियों के साथ बाघमारा घाट पर बैठक कर कटावरोधी कार्य के निर्देश दिये थे। कार्य संपन्न हुए अभी चंद रोज ही बीते हैं कि कटावरोधी कार्य में विभागीय अभियंताओं एवं संवेदकों की कार्य में बरती गयी लापरवाही सामने आने लगी है। कार्य के दौरान अनेक मौके पर मानसून की बौछार के बीच भी कार्य की गुणवत्ता की सच्चाई सामने आती रही है।ताजा मामला शुक्रवार का है जब दोपहर बाद गांधीटोला के पास बने एक नोज का कुछ अग्रभाग नदी के जलप्रवाह में ढ़ह गया।कुछ एक जगह बोल्डर पीचिंग क्रेट सहित दरक गया।गांव को कटाव से बचाने के लिए हुए कटावरोधी कार्य के कटाव का शिकार होते देख ग्रामीण सिहर उठे। ग्रामणों की कोप के मद्देनजर मौके पर विभाग के कनीय अभियंता रामदुलार महतो , सहायक अभियंता आलोक कुमार व ग्रामणों के बीच रात 8 बजे तू तू मै मै होती रही।मजदूरी का भुगतान सही समय पर नहीं किये जाने से नाराज मजदूर काम करने से मना कर दिया इस बीच समाज सेवी करण मानस व प्रबुद्ध ग्रामीणों की पहल पर मजदूर क्षतिग्रस्त स्थल पर काम करने को राजी हुए। अभी नदी में बाढ़ का जल स्तर व प्रवाह वेग काफी कम है। जब बाढ़ का कहर अपनी चरम पर होगा तो इसकी कल्पना की जा सकती है।
