कांग्रेस पार्टी कटिहार ईकाई ने प्रेस वार्ता आयोजित कर विभिन्न मुद्दों किया चर्चा।
उमर मुर्शीद । कटिहार
कटिहार जिला कांग्रेस के नेताओं ने मिर्चाईबारी जिला अध्यक्ष प्रेम राय के आवास पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। जिसमें कटिहार जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रेम राय ने कहा कि राहुल गांधी की सदस्यता साजिश के तहत सिर्फ इसलिए चली गई कि उन्होंने अडानी और मोदी के संबंधों पर सदन में सवाल उठाया था साथ ही ललित मोदी और नीरव मोदी जो देश का हजारों लाखों करोड रुपया लेकर भाग गए उन्हे चोर कहा और भारतीय जनता पार्टी ने नीरव मोदी ललित मोदी को चोर कहे जाने पर कहा कि यह ओबीसी का अपमान है। आखिर चोर को चोर नहीं कहा जाएगा तो क्या कहा जाएगा। भारतीय जनता पार्टी ने ओबीसी वर्ग के लोगों को अपमानित करने का कार्य किया है। इस अवसर पर पूर्व विधायक सत्यनारायण प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना के मामले को उठाया है की जातीय जनगणना देश की मांग है। प्रधानमंत्री 2011 की जनगणना के आंकड़े को सार्वजनिक करें। देश में ओबीसी की जनसंख्या बताएं जिसकी जितनी आबादी उनका उतना हक का नारा उन्होंने बुलंद किया है प्रधानमंत्री को समझना होगा कि वंचितों को खोखले शब्द नहीं बल्कि अपना हक चाहिए। सेवा दल के राष्ट्रीय प्रशिक्षक रहे प्रोफेसर विनोद यादव ने कहा की जातीय जनगणना जरूरी क्यों है।जातियों का डाटा सामने नहीं आएगा तब तक यह कैसे तय होगा कि देश के प्रगति में किसकी कितनी भागीदारी हो। सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों में किसको कितना हक मिले इस बात पर आगे बात करेंगे उससे पहले एक डाटा प्रस्तुत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रालय में अतिरिक्त सचिवों में एक भी सचिव ओबीसी नहीं है। वही सचिवों में 1 अनुसूचित जाति जबकि 3 अनुसूचित जनजाति संयुक्त सचिव के पद पर 4% अनुसूचित जाति 3% अनुसूचित जनजाति और 7% ओबीसी तैनात है। यह तो अधिकारियों की बात हो गई अब शिक्षा क्षेत्र के भी आंकड़े देख लीजिए 2021- 2022 में आईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी एसटी ओबीसी फैकल्टी के 70% पद खाली रह गए केंद्रीय विश्वविद्यालयों में केवल एक कुलपति एससी समुदाय से 1 एसटी समुदाय से और 7 ओबीसी समुदाय से हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दो रजिस्टर एससी समुदाय के 5 एसटी समुदाय के और तीन ओबीसी समुदाय के हैं। यह आंकड़े देखकर समझ में आता है कि स्थिति कितनी भयावह है। कटिहार जिला पिछड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि मोदी सरकार ओबीसी समुदाय का वोट तो ले लेती है लेकिन उन्हें ताकत नहीं देती उनके लिए काम नहीं करती जातियों का डाटा होगा तो जिसकी जितनी आबादी है उसे उतना हक मिल सकेगा लेकिन मोदी सरकार यह नहीं चाहती। कांग्रेस पूरी तरह से जातीय जनगणना के पक्ष में है और हम यह मांग करते हैं कि देश के पिछड़ों आदिवासियों और दलित समुदाय के उत्थान के लिए मोदी सरकार जातीय जनगणना कराएं। सामाजिक न्याय के लिए यह बहुत जरूरी है। कटिहार जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष मीना देवी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद दिया कि उन्होंने अपने प्रयास से बिहार में जातिगत जनगणना करवा रहे हैं। लीगल सेल अध्यक्ष रंगीला यादव ने कहा कि यूपीए सरकार ने पहली बार 2011-12 के दौरान करीब 25 करोड़ परिवारों को कवर करते हुए सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना एसईसीसी कराई थी। मई 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद कांग्रेस और अन्य सांसदों ने इसे जारी करने की मांग की लेकिन मोदी सरकार ने जातिगत आंकड़े को प्रकाशित नहीं किया जिसके कारण सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण कार्यक्रम में विशेष रूप से ओबीसी के उत्थान के लिए बेहद आवश्यक डेटाबेस अधूरा है। कांग्रेस नेता अधिवक्ता प्रमोद मंडल ने कहा कि जातिगत जनगणना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। 2021 में दसवार्षिक जनगणना होनी थी लेकिन अभी तक नहीं हो पाई। कांग्रेस ने मांग किया इसे तुरंत किया जाए और व्यापक जातिगत जनगणना को इसका अभिन्न अंग बनाया जाए 2011 की जनगणना के आंकड़े को सार्वजनिक करने की मांग की है।
(दर्शाए गए इन आंकड़ों को पब्लिक न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है)
