July 29, 2026

अखंड सुहाग की कामना को लेकर सुहागिनों ने की बट सावित्री पूजा ।

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रतन कुमार ओझा (मनिहारी)

कटिहार जिले के ग्रमीण व शहरी अंचलों मे शुक्रवार को अहले सुबह से ही सुहागिन महिलाएं पवित्र नदियों, सरोवरों, तालाबों मे स्नान कर अक्षयबट बृक्ष की नियम व निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना कर अपने दीर्घ सौभाग्य की कामना की।सनातन धर्म मे महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र ,सुखी दाम्पत्य जीवन सहित अपनी अखंड सुहाग की कामना को लेकर अनेक तरह की व्रत का पालन करती है। बट सावित्री का व्रत भी सौभाग्य व अखंड सुहाग प्राप्ति का व्रत माना जाता है। ज्येष्ठ मास की कृष्णपक्ष अमावस को बट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षार्थ मनाती है। धार्मिक मान्यता है कि बट बृक्ष में माता लक्ष्मी हरवक्त वास करती है।अत एव बरगद(बटबृक्ष) की पूजा करने से मनोवांक्षित फल प्राप्त होता है। मान्यता है की मार्कडेय ऋषि को भगवान कृष्ण ने बरगद के पत्ते पर ही दर्शन दिया था। बरगद बृक्ष का पर्यावरण संरक्षण मे भी बड़ा योगदान माना गया है।इसे प्राण वायु ( आक्सीजन)उत्सर्जन का केन्द्र भी माना गया है। एक जानकारी के अनुसार सामान्य पेड़ों की अपेक्षा बरगद का पेड़ बीस घंटे तक आक्सीजन का उत्सर्जन करता है। इसलिए सुहागिन महिलाएं बट सावित्री व्रत के दिन गरगद बृक्ष को सींचती हैं।पूजा-अर्चना करती हैं।भगवान बुद्ध को भी बरगद के पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। अत एव धार्मिक व लोक मंगल की कामना को लेकर बटबृक्ष की पूजा -अर्चना सुहागिन महिलाएं सौभाग्य – ऋंगार से सजधजकर नियम-निष्ठा व संकल्प के साथ बटसावित्री की उपासना करती हैं।

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