प्राणपुर प्रखंड अंतर्गत प्राणपुर पंचायत में वट सावित्री पूजा महिलाएं हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया
प्राणपुर (मोहम्मद आरिफ़)
सार्वजनिक काली मंदिर प्राणपुर में काली पूजा धूमधाम से मनाया जा रहा है वही दूध दराज से सरद्दालू पहुंच रहे हैं बताया जा रहा है कि यह मंदिर सदियों पुराना है जो की जो भी अपना इच्छा अनुकूल जो भी मांगते हैं उनका पूरा होता है इसलिए इस मंदिर में दुध दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं इस मौके पर समस्त ग्रामीण तन मन से जुटे हुए हैं।यह एक लोग आस्था का पर्व हैशादीशुदा महिलाएं वट सावित्री पूजा धूमधाम से मनाया वहीं प्राणपुर में देखा गया कि काफी संख्या में महिला पहुंची वट सावित्री व्रत पूजा बरगद की तरह लंबी आयु के लिए सुहागिनों द्वारा संपन्न आज शहर के विभिन्न भागों और गांव कशुऊ में खड़े वट वृक्ष वर्ग की पूजा और फलों का चढ़ावा सिंदूर और धागों से तने की प्रदर्शन जाकर हर्षउला से मनाया गया व्हाट सावित्री व्रत सुहागन महिलाएं अपनी सुहाग की रक्षा और लंबी आयु के वरदान के लिए रखती है कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती है वट सावित्री व्रत के लिए और संतान के सौभाग्य के भारतीय संस्कृति में यह आदर्श का प्रतीक है व्हाट वृक्ष का पूजन और सावित्री सत्यवान की कथा का स्मरण करने के विधान के कारण ही प्रसिद्ध हुआ था उन्होंने संतान की प्राप्ति के लिए मंत्र देवी ने प्रकट होकर भर दिया कि राजन तुझे एक तेजस्वी कन्या पैदा होगी सावित्री देवी की कृपा से जन्म लेने की वजह से कन्या का नाम सावित्री रखा गया था करने की सलाह दी थी परंतु सावित्री ने सत्यवान से ही विवाह किया एवं महिलाएं बड़ी संख्या में पूजा कर अपने पति के सिर पर जल छेता कर कर मिनट बाद का पंखा झील का शरीर के अंगों को शीतल किया
