मनिहार के मजदूर पलायन को विवश, मनरेगा जैसी महत्वाकांछी योजना हो रही असफल, स-समय नही मिलती मजदूरी
मनिहारी (रतन कुमार ओझा)
मनरेगा योजना धरातलीय स्तर पर मजदूरों के पलायन को रोकने में असफल साबित होती जा रही है जबकि योजना का मूल उद्देश्य ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम सौ दिनों की रोजगार प्रदान करना है ताकि मजदूरों के पलायन को रोका जा सके।सुत्रो के अनुसार मजदूरों का भुगतान भी गत वर्ष 15 दिसंबर से पुरे प्रदेश का रुका हुआ है। ऐसे में मनिहारी अनुमंडल के मजदूरों का रोजगार की तलाश में पलायन होना लाजिमी है। मालूम हो कि मनरेगा के तहत व्यक्तिगत लाभ की योजना के तौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना, चेक डेम निर्माण, आहर, पाईन, सड़क निर्माण, सार्वजनिक भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन की संरचनाओं का निर्माण, तालाब निर्माण, बागवानी, पौधरोपण, तालाब, पशु शेल्टर, बकरी शेल्टर, वर्मी कंपोस्ट निर्माण, पोल्ट्री शेल्टर, जैविक खाद निर्माण और सोख्ता निर्माण के अलावा अन्य निर्माण शामिल है। राशि के अभाव में उपरोक्त सभी योजनाओं का कार्य भी प्रभावित होता रहा है। हालांकि मनिहारी में फिलहाल सतत जीविकोपार्जन कार्यक्रम के तहत पशु शेड का निर्माण कुमारीपुर,दक्षिणी कांटाकोश,एवं उत्तरी कांटाकोष पंचायत में चल रहा है,वहीं मनरेगा एवं शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक विद्यालय फतेहनगर पंचायत के गोपालपुर तथा नवाबगंज के प्राथमिक विद्यालय बालुटोला में चारदीवारी का निर्माण हो रहा है।वहीं वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत अनुमंडल के विभिन्न पंचायतों में चार माह के अंदर कुल 30,800 पौधों का वृक्षारोपण चल रहा है। लेकिन इतने मात्र से छेत्र के मजदूरों के रोजगार की कमी को पूर्ण करना असंभव सा जान पड़ता है। जिसके कारण मनिहारी समेत आसपास के कामगारों को दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जाना पड़ता है।
