मूलनिवासी संघ कटिहार के पूर्व जिलाध्यक्ष भगवान मंडल का हुआ परिनिर्वाण।
बारसोई (डेस्क)
मूलनिवासी भगवान मंडल के परिनिर्वाण पर बहुजन मूल निवासी समाज में शोक की लहर। बताते चले कि दिवंगत भगवान मंडल जी पेशे से एक शिक्षक थे। वे कटिहार में बहुजन मूलनिवासी आंदोलन के अगवा माने जाते थे। वे मूलनिवासी संघ के जिलाध्यक्ष रहे और मूलनिवासी आंदोलन व कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। भगवान बाबू धार्मिक पाखंड के कट्टर विरोधी थे। वे एससी, एसटी ओबीसी मूलनिवासी समाज के एकता पर बल देते थे। बामसेफ के राजकमल ने कहा कि वे देश के कोने-कोने में जाकर मूलनिवासी संघ के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लेकर कटिहार का प्रतिनिधित्व करते रहे। कटिहार में मूल निवासी बहुजन विचारधारा को प्रचारित और प्रसारित करने में उनका योगदान अग्रणी रहा है। शव यात्रा में मूलनिवासी संघ ने अपने अंदाज में नीले झंडे के साथ “जन्म-मरण सत्य है। भगवान मंडल अमर रहे-अमर रहे। भगवान बाबू अमर रहे आदि नारे लगाए। लोग नीले झंडे के साथ शव यात्रा में चले। स्थानीय लोगों ने बताया कि मूल निवासी भगवान मंडल जी परिनिर्वाण के 01 दिन पहले तक मूलनिवासी संघ का पत्रिका मूल निवासी टाइम्स अपने आस-पास के मूल निवासी विचारधारा के लोगों को दिए थे। उन्होंने बहुजन महापुरुषों के विचार और उनके आंदोलन का प्रसार अपने अंतिम समय तक किया ताकि समाज का उत्थान हो सके। इंजीनियर गिरिजा प्रसाद सिंह ने कहा कि मूलनिवासी भगवान मंडल जी ज्योतिबा राव फुले, छत्रपति साहू जी महाराज, पेरियार ललई सिंह यादव, बिहार लेनिन अमर शहीद बाबू जगदेव, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जीवनी से काफी प्रभावित थे।मुलनिवासी भगवान मंडल जी मूल रूप से मनिहारी के बोलिया ग्राम निवासी थे उन्होंने मनिहारी में भी गांव-गांव जाकर मूलनिवासी आंदोलन को खड़ा किया। मूलनिवासी बहुजन समाज ने नीले झंडे के नीचे मूलनिवासी भगवान मंडल को अंतिम श्रद्धांजलि दिया। शव यात्रा के दौरान मूलनिवासी संघ के वर्तमान अध्यक्ष श्रीलाल उरांव, मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण संघ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य- अजय कुमार यादव, बामसेफ बिहार राज्य अध्यक्ष राजकमल, बालेश्वर यादव, रवि कुमार, पीपीआईडी के अनिल पासवान, संजय मंडल, भारतेंदु अजय, शिक्षक संघ के नूर आलम, अब्दुल रहमान, डॉ सुरेंद्र यादव, लक्ष्मीकांत प्रसाद, कचाली मंडल आदि मूल निवासी संघ के कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे और उनके निधन को अपूरणीय नुकसान बताया। शव यात्रा में जय भीम।। जय मूलनिवासी ।।जन्म-मरन सत्य है का उद्घोष चलता रहा।
